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दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित हैट स्पीच के लिए अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर की मांग वाली वृंदा करात की याचिका खारिज की

Sharafat
13 Jun 2022 11:36 AM GMT
दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित हैट स्पीच के लिए अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर की मांग वाली वृंदा करात की याचिका खारिज की
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को सीपीएम नेता वृंदा करात और राजनेता केएम तिवारी द्वारा निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक रिट याचिका खारिज कर दी, जिसमें भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ साल 2020 में हैट स्पीच देने के पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।

निचली अदालत ने भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ हैट स्पीच देने पर एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली सीपीएम नेता वृंदा करात और राजनेता केएम तिवारी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

जस्टिस चंद्रधारी सिंह का विचार कि यद्यपि रिट याचिका सुनवाई योग्य है, लेकिन कानून की स्थापित स्थिति के साथ-साथ एक प्रभावी वैकल्पिक उपाय के अस्तित्व पर न्यायिक निर्णयों को देखते हुए उस पर विचार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के वकील दंड प्रक्रिया संहिता के तहत निर्धारित सिस्टम का पालन करने में विफल रहे।

कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आदेश पारित करते समय मामले के गुण-दोष पर विचार नहीं किया और उसने अधिकार क्षेत्र के आधार पर शिकायत का फैसला किया। इसमें आगे कहा गया है कि हाईकोर्ट को नियमित रूप से ऐसे मामलों में अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं करना चाहिए यदि प्रभावी वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं।

न्यायालय का विचार था कि जिन मामलों में प्रभावी वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं, उन्हें समाप्त कर दिया जाना चाहिए और न्याय के हित में आकस्मिक मामलों को छोड़कर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

अदालत ने 25 मार्च, 2022 को याचिका में आदेश सुरक्षित रखा था। इसने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश एडवोकेट तारा नरूला और अदित एस पुजारी को सुना।

जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने कथित हैट स्पीच से जुड़ी आपराधिकता पर याचिकाकर्ताओं के वकील पर सवाल उठाते हुए मौखिक रूप से इस प्रकार टिप्पणी की,

"क्या भाषण आंदोलन सथल के सामने दिया गया था? इसलिए मैं कह रहा हूं, "ये लोग", (भाषण के शब्द) किसे इंगित करते हैं? किसी विशेष समुदाय को नहीं। "ये लोग" कोई भी हो सकते हैं। आप इसे कैसे तय कर सकते हैं या इसके बारे में कैसे सोच सकते हैं? कोई प्रत्यक्ष नहीं है मैं इस मुद्दे पर नहीं हूं कि इसका क्या मतलब था क्योंकि हम इस रिट याचिका में केवल कानूनी मुद्दे से निपट रहे हैं।"

उन्होंने कहा , ''उस भाषण में सांप्रदायिक मंशा कहां है?''

मामले के बारे में

याचिका में दो राजनेताओं द्वारा दिए गए विभिन्न भाषणों का उल्लेख है, जिसमें अनुराग ठाकुर द्वारा 27 जनवरी, 2020 को दिए गए भाषण में "देश के गद्दारों को, गोली मारों सालो को" का नारा लगाया गया था।

भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रचार करते हुए और बाद में एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में प्रवेश वर्मा द्वारा 27-28 जनवरी, 2020 को दिए गए एक अन्य भाषण का भी संदर्भ दिया गया था।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि भाषण ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के मद्देनजर शाहीन बाग में विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग की धमकी दी और मुस्लिम व्यक्तियों के खिलाफ नफरत और दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए उन्हें आक्रमणकारियों के रूप में चित्रित किया जो घरों में प्रवेश करेंगे और बलात्कार करेंगे।

चुनाव आयोग ने 29 जनवरी को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को उनके "देश के गद्दारों को" नारे के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया था। आयोग ने अपने नोटिस में पाया था कि प्रथम दृष्टया टिप्पणी में "सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की प्रकृति" थी और भाजपा सांसद ने आचार संहिता और चुनावी कानून का उल्लंघन किया था।

दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी ने पश्चिमी दिल्ली के बीजेपी सांसद परवेश वर्मा के शाहीन बाग पर भड़काऊ बयान को लेकर चुनाव आयोग को रिपोर्ट भी भेजी थी।

दिनांक 28 अगस्त 2020 के आदेश के तहत, ट्रायल कोर्ट ने सीआरपीसी की 156 (3) धारा के तहत आईपीसी की धारा 153ए, 153बी, 295ए, 298, 504, 505 और 506 के तहत अपराधों के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं के आवेदन को खारिज कर दिया था।

केस टाइटल : बृंदा करात और अन्य बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और अन्य।

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