Opindia को अंतरिम राहत मामले में झटका: स्वाति चतुर्वेदी पर प्रकाशित दो लेख हटाने का आदेश
Amir Ahmad
15 May 2026 12:18 PM IST

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने समाचार पोर्टल Opindia चलाने वाली कंपनी आधार्यासी मीडिया एंड कंटेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी के खिलाफ प्रकाशित दो कथित मानहानिकारक लेख हटाने का निर्देश दिया।
जिला जज मीनू कौशिक ने स्वाति चतुर्वेदी की ओर से दायर अंतरिम निषेधाज्ञा याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।
स्वाति चतुर्वेदी ने अदालत में कहा कि ओपइंडिया ने उनके खिलाफ ऐसे लेख प्रकाशित किए, जिनमें गलत तरीके से दावा किया गया कि वह वामपंथी प्रचार वेबसाइट 'द वायर' से जुड़ी हैं। उनका कहना था कि इससे उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा और सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचा।
उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद न तो लेख हटाए गए और न ही बिना शर्त माफी मांगी गई।
विवादित लेखों के शीर्षक थे — “स्वाति चतुर्वेदी मय बी डिल्यूशनल- सोर्सेज” और "द वायर एंड इट्स स्टार जर्नलिस्ट पेडल्स अनदर एब्सर्ड लाई अबाउट आरएसएस एंड बीजेपी"।
चतुर्वेदी का आरोप था कि इन लेखों में उन्हें “भ्रमित”, “साहित्यिक चोरी करने वाली” और “उगाही रैकेट चलाने वाली” बताया गया।
वहीं ओपइंडिया की ओर से अदालत में दलील दी गई कि लेख अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार के तहत संरक्षित हैं और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री पर आधारित हैं। यह भी कहा गया कि किसी संस्था को वामपंथी कहना मानहानि नहीं माना जा सकता और लेख पत्रकारिता की स्वीकार्य सीमाओं के भीतर टिप्पणी हैं।
हालांकि, अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि जिन स्रोतों का हवाला देकर लेख प्रकाशित किए गए, वे स्वाति चतुर्वेदी के खिलाफ लगाए गए कई गंभीर आरोपों, विशेष रूप से उगाही रैकेट चलाने के दावे का समर्थन नहीं करते।
अदालत ने कहा कि मुकदमे के लंबित रहने तक विवादित लेख हटाने से ओपइंडिया को कोई अपूरणीय क्षति नहीं होगी और न ही उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन माना जाएगा, क्योंकि उन्हें मुकदमे के दौरान अपना पक्ष साबित करने का पूरा अवसर मिलेगा।
कोर्ट ने आदेश में कहा,
“प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे 2 जून 2018 और 8 मई 2019 के विवादित लेख अपनी वेबसाइट से हटाएं। साथ ही मुकदमे के लंबित रहने तक वादी के खिलाफ कोई मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित न करें।”
इसी निर्देश के साथ अदालत ने अंतरिम आवेदन का निस्तारण किया।

