दिल्ली कोर्ट ने पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ FIR दर्ज करने का दिया आदेश, हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने का है आरोप

Amir Ahmad

28 Jan 2025 6:14 AM

  • दिल्ली कोर्ट ने पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ FIR दर्ज करने का दिया आदेश, हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने का है आरोप

    दिल्ली कोर्ट ने पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। एक वकील ने शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और 'X' (पूर्व में ट्विटर) प्लेटफॉर्म पर अपने पोस्ट के माध्यम से भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया।

    साकेत कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हिमांशु रमन सिंह ने कहा कि अय्यूब के खिलाफ भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 153ए, 295ए और 505 के तहत दंडनीय प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनते हैं।

    अदालत ने कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए शिकायत में संज्ञेय अपराधों का खुलासा किया गया, जिसके लिए FIR दर्ज करना उचित है। धारा 156(3) CrPC के तहत वर्तमान आवेदन को स्वीकार किया जाता है। साइबर पुलिस स्टेशन, दक्षिण के SHO को निर्देश दिया जाता है कि वे शिकायत की सामग्री को FIR में परिवर्तित करें और मामले की निष्पक्ष जांच करें।

    पिछले साल 11 नवंबर को पेशे से वकील अमिता सचदेवा ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें सोशल मीडिया पोस्ट के लिए अय्यूब के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का अनुरोध किया गया था।

    सचदेवा ने आरोप लगाया कि अय्यूब ने हिंदू देवताओं का अपमान करने, भारतीय एकता के ताने-बाने को खराब करने और भारतीय सेना सहित भारत और उसके नागरिकों के प्रति शत्रुता को बढ़ावा देने के लिए लगातार अपने सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया।

    सचदेवा का कहना था कि अनुवर्ती कार्रवाई के बावजूद, उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने CrPC की धारा 156(3) के तहत आवेदन दायर कर पत्रकार के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।

    याचिका स्वीकार करते हुए जज ने कहा कि कार्रवाई रिपोर्ट के अनुसार यह कहा गया कि प्रारंभिक जांच के दौरान और शिकायत की सामग्री के आधार पर यह निर्धारित किया गया कि शिकायत में वर्णित अपराध की प्रकृति गैर संज्ञेय प्रकृति की थी।

    न्यायालय ने कहा,

    “आरोपों की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय का विचार है कि धारा 156(3) CrPC के तहत न्यायिक शक्ति का प्रयोग करते हुए वर्तमान मामले में जांच का आदेश देना समीचीन है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्य ऐसे हैं, जिनके लिए पुलिस जांच के रूप में राज्य मशीनरी के हस्तक्षेप की आवश्यकता है और शिकायतकर्ता सबूत इकट्ठा करने की स्थिति में नहीं होगा।”

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