निशु आजाद और पिता के खिलाफ FIR की मांग, सांप्रदायिक सोशल मीडिया पोस्ट का आरोप

Amir Ahmad

16 Sept 2026 4:48 PM IST

  • निशु आजाद और पिता के खिलाफ FIR की मांग, सांप्रदायिक सोशल मीडिया पोस्ट का आरोप

    दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की प्रदर्शनकारी निशु आजाद और उनके पिता के खिलाफ कथित आपत्तिजनक एवं सांप्रदायिक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर FIR दर्ज करने की मांग करते हुए याचिका दायर की गई।

    पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मृदुल गुप्ता 23 सितंबर को एडवोकेट अमिताश सचदेवा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेंगे।

    शिकायत में आरोप लगाया गया कि नाबालिग निशु आजाद ने सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट किए, जिनसे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा मिला। याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत FIR दर्ज करने का अनुरोध किया गया।

    शिकायतकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 के तहत वैमनस्य फैलाने धारा 299 के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धारा 353 के तहत लोक उपद्रव से संबंधित अपराधों में कार्रवाई की मांग की।

    यह मामला स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े विवाद के बाद सामने आया है। आरोप है कि एक विवाद के दौरान उनके साथ कहासुनी हुई जिसमें निशु के पिता के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई और उन्हें चोटें आईं। इसके बाद भारद्वाज के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के तहत FIR दर्ज की गई। इस मामले में उसे मंगलवार को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी गई।

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि निशु आजाद के सोशल मीडिया पोस्ट में भगवान शिव, भगवान श्रीकृष्ण, मां सरस्वती और मां दुर्गा जैसे हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।

    अमिता सचदेवा का कहना है कि निशु आजाद को कथित पोस्ट हटाने का अवसर दिया गया लेकिन पोस्ट नहीं हटाए गए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली पुलिस में शिकायत देने के साथ अदालत का रुख किया।

    शिकायत में कहा गया कि किसी की आस्था से असहमति रखना व्यक्तिगत अधिकार हो सकता है लेकिन इससे दूसरे धर्म के देवी-देवताओं और उनकी पूजा का मजाक उड़ाने या उनका अपमान करने का अधिकार नहीं मिलता।

    शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कथित सामग्री को नोटिस दिए जाने के बाद भी सोशल मीडिया खाते पर मौजूद रहने देने वालों को कानून की प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

    अदालत अब 23 सितंबर को इस शिकायत पर सुनवाई करेगी।

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