दिल्ली मेट्रो में महिला के पास अश्लील हरकत करने वाले व्यक्ति की सजा बरकरार, कोर्ट ने कहा- महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि

Amir Ahmad

10 March 2026 2:56 PM IST

  • दिल्ली मेट्रो में महिला के पास अश्लील हरकत करने वाले व्यक्ति की सजा बरकरार, कोर्ट ने कहा- महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि

    दिल्ली कोर्ट ने मेट्रो ट्रेन में महिला के पास खड़े होकर अश्लील हरकत करने वाले व्यक्ति की सजा बरकरार रखी।

    अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के खिलाफ ऐसे अपराध न केवल शारीरिक बल्कि गहरे मानसिक आघात भी पहुंचाते हैं और उनकी सुरक्षा व निजता की भावना को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।

    साकेत अदालत के एडिशनल सेशन जज हरगुरवारिंदर सिंह जग्गी ने आरोपी की अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। यह मामला वर्ष 2021 का है जब येलो लाइन की मेट्रो ट्रेन में साकेत और आईएनए स्टेशन के बीच यह घटना हुई थी।

    ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 और 354ए के तहत दोषी ठहराया था।

    अदालत ने पाया था कि आरोपी ने भीड़भाड़ वाले मेट्रो कोच में महिला के पास खड़े होकर अपने कपड़े उतारकर अश्लील हरकत की और उसे छुआ। इसके लिए उसे प्रत्येक अपराध के लिए एक-एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा और जुर्माना सुनाया गया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया।

    अभियोजन के अनुसार घटना के दौरान महिला ने मेट्रो में शोर मचाया, जिसके बाद अन्य यात्रियों ने आरोपी को ट्रेन से उतरने के लिए मजबूर कर दिया। बाद में आईएनए मेट्रो स्टेशन पर उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई।

    अपील में आरोपी ने तर्क दिया कि उसकी सजा केवल शिकायतकर्ता महिला के बयान के आधार पर दी गई। उसने कहा कि घटना भीड़भाड़ वाली मेट्रो में हुई, फिर भी कोई सीसीटीवी फुटेज या स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया।

    आरोपी ने समय और स्थान को लेकर कथित विरोधाभासों का हवाला देते हुए खुद को झूठा फंसाए जाने का दावा भी किया।

    हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि महिला की गवाही स्पष्ट और विश्वसनीय है और अन्य परिस्थितियां भी घटना की पुष्टि करती हैं।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला दिल्ली मेट्रो में यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षण से जुड़ी गंभीर चिंताओं को उजागर करता है, जो आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण विषय है।

    जज ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सही कहा था कि सार्वजनिक स्थानों खासकर भीड़भाड़ वाली मेट्रो में महिलाओं के खिलाफ किए गए अपराध उनकी निजता और सुरक्षा की भावना का गंभीर उल्लंघन करते हैं और गहरा मानसिक आघात पहुंचाते हैं।

    अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि घटना के दौरान महिला को मदद पाने के लिए आपातकालीन बटन दबाना पड़ा, जिसके बाद मेट्रो कर्मचारियों ने तुरंत कार्रवाई की और आरोपी को ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन के कंट्रोलर कक्ष में पकड़ लिया गया।

    अंत में अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला पीड़िता की प्रत्यक्ष गवाही और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों पर आधारित है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

    इस प्रकार आरोपी की सजा बरकरार रखी गई।

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