यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण सिंह की बरी होने के खिलाफ पहलवानों की अपील, जवाब देने का आखिरी मौका
Amir Ahmad
28 Oct 2026 3:53 PM IST

दिल्ली कोर्ट ने बुधवार (28 अक्टूबर) को बीजेपी नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के खिलाफ चार महिला पहलवानों की अपील पर जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया।
राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने 28 सितंबर 2026 को बृजभूषण सिंह को नोटिस जारी किया था। चार महिला पहलवानों ने 3 अगस्त को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की ओर से पारित बरी किए जाने के आदेश को चुनौती दी।अपील में कहा गया है कि निचली अदालत का आदेश कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है और इसमें उपलब्ध साक्ष्यों का स्पष्ट रूप से गलत तथा चुनिंदा आकलन किया गया। पहलवानों का कहना है कि आदेश ठोस साक्ष्यों के बजाय अनुमानों पर आधारित है और इसमें कानून के स्थापित सिद्धांतों को लागू नहीं किया गया।
अपील में यह भी आरोप लगाया गया कि फैसले के एक महत्वपूर्ण हिस्से में यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के कथित अपेक्षित व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं पर भरोसा किया गया, जबकि पीड़िताओं
की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए साक्ष्यों का निष्पक्ष आकलन किया जाना चाहिए।
निचली अदालत ने बृजभूषण सिंह को बरी करते समय पीड़िताओं की ओर से लंबे समय तक शिकायत नहीं करने आरोपी के साथ उनके संबंधों के सौहार्दपूर्ण बने रहने और गवाहियों में विरोधाभास जैसी परिस्थितियों का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि इन परिस्थितियों से अभियोजन पक्ष के मामले पर उचित संदेह पैदा होता है।
फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि रिकॉर्ड में ऐसी कई तस्वीरें मौजूद थीं जिनसे पता चलता है कि पीड़िताओं ने बृजभूषण सिंह को पारिवारिक समारोहों और शादी के कार्यक्रमों में आमंत्रित किया।
निचली अदालत ने यह भी कहा कि यह बात समझ में आती है कि कथित तौर पर उस समय डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष रहे बृजभूषण सिंह के खिलाफ शिकायत करने पर महिला पहलवानों के करियर को नुकसान पहुंच सकता था। हालांकि अदालत ने सवाल उठाया था कि इसके बावजूद वे वर्षों तक उनके साथ सौहार्दपूर्ण संबंध क्यों बनाए रखती रहीं।
एसीजेएम ने अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहने का हवाला देते हुए बृजभूषण सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354ए और 506 (भाग-1) के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया।
चारों महिला पहलवानों की मौजूदा अपील में इसी फैसले को चुनौती दी गई।

