LPG सिलेंडर कालाबाजारी मामला: दिल्ली कोर्ट ने अग्रिम जमानत ठुकराई, बढ़ती कीमतों के बीच अपराध को बताया गंभीर

Amir Ahmad

4 April 2026 3:24 PM IST

  • LPG सिलेंडर कालाबाजारी मामला: दिल्ली कोर्ट ने अग्रिम जमानत ठुकराई, बढ़ती कीमतों के बीच अपराध को बताया गंभीर

    दिल्ली कोर्ट ने LPG सिलेंडरों की कथित अवैध खरीद-फरोख्त और कालाबाजारी के मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया।

    अदालत ने कहा कि बढ़ती कीमतों और आम लोगों की बढ़ती निर्भरता के दौर में ऐसे अपराध और भी गंभीर हो जाते हैं।

    साकेत कोर्ट के एडिशनल सेशन जज विनोद कुमार गौतम ने आरोपी मुकेश कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। आरोपी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज है।

    अभियोजन के अनुसार, मामला LPG सिलेंडरों की अवैध खरीद, परिवहन और कालाबाजारी से जुड़ा है, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सुरक्षा पर असर पड़ता है।

    राज्य की ओर से कहा गया कि आरोपी इस पूरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता है और अपराध में इस्तेमाल वाहन का मालिक भी है। साथ ही वह जांच से बचता रहा है।

    अदालत को बताया गया कि जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और कॉल डिटेल रिकॉर्ड सहित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाना बाकी है। ऐसे में आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है ताकि पूरे नेटवर्क और अन्य आरोपियों की पहचान की जा सके।

    वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपराध जमानती है। बरामदगी पहले ही हो चुकी है और आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। यह भी कहा गया कि समान परिस्थिति वाले सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।

    हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी की भूमिका अन्य सह-आरोपियों से अलग और अधिक गंभीर है।

    अदालत ने टिप्पणी की,

    “आवश्यक वस्तुओं, विशेषकर LPG सिलेंडरों की कालाबाजारी से जुड़े अपराध, बढ़ती कीमतों और जनता की बढ़ती निर्भरता के समय अधिक गंभीर हो जाते हैं। ऐसे आर्थिक अपराध सार्वजनिक हित की जड़ पर प्रहार करते हैं।”

    कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी का जांच में सहयोग न करना और उससे बचने की कोशिश करना उसके खिलाफ जाता है।

    इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि यह टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के संदर्भ में हैं और मामले के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगी।

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