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COVID-19 : प्रभावित लोगों के लिए जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट के न्यायाधीश देंगे 25-25 हज़ार रुपए, आवश्यक मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी

LiveLaw News Network
24 March 2020 11:02 AM GMT
COVID-19 :  प्रभावित लोगों के लिए जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट के न्यायाधीश देंगे 25-25 हज़ार रुपए, आवश्यक मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी

कोरोना वायरस (COVID-19) के संक्रमण, उसके कारण लगे प्रतिबंधों और उनके प्रभाव के अनुमानों को ध्यान में रखते हुए, जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट की फुल बेंच ने प्रभावित व्यक्तियों के भले के लिए एक निश्चित राशि का योगदान करने का निर्णय लिया है।

बैठक में यह तय किया गया कि मुख्य न्यायाधीश और हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश 25-25 हज़ार रुपये का योगदान देंगे। इसी प्रकार, अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों के साथ-साथ हाईकोर्ट व अधीनस्थ न्यायालयों के सभी राजपत्रित अधिकारी और अन्य कर्मचारी भी एक निश्चित निश्चित राशि का योगदान दे सकते हैं।

इसी बीच , यह निर्देश भी दिया गया है कि सभी सामान्य मामलों को दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट के दोनों विंग या खंड के फाइलिंग काउंटर को बंद रखा जाएगा और ऐसी अवधि के दौरान जिन मामलों की फाइलिंग की समय-सीमा समाप्त हो रही है,उन मामलों में इस समाप्ति की तिथि को उस दिन समाप्त माना जाएगा,जिस दिन फिर से फाइलिंग शुरू हो जाएगी।

हालांकि किसी आवश्यक मामले का उल्लेख या मेंशनिंग टेलिफोन के जरिए की जा सकेगी,जिसके लिए मामले का आवश्यक विवरण बता दिया जाए।

इसके अलावा, सूची की तारीख से एक दिन पहले वकील को ई-मेल के माध्यम से दोपहर 3.00 बजे तक संबंधित रजिस्ट्रार न्यायिक को एक आग्रह ज्ञापन या मैमो भेजना पड़ेगा। मामले की जरूरी सुनवाई के बारे में संतुष्ट होने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से केस को सुना जाएगा।

हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में और बहुत जरूरी मामले में, वीडियो कॉल सुविधा का उपयोग करके भी दूर-दराज के मामलों की सुनवाई की जा सकती है।

वीडियो कॉल के लिए अनुरोध केस के पक्षकार और वकील के फोटो के साथ किया जाना चाहिए और ऐसी कॉल केवल हाईकोर्ट की तरफ से शुरू, समाप्त और नियंत्रित की जाएगी।

इसके अंत में यह निर्देशित किया गया है-

-दोनों विंग के रजिस्ट्रार न्यायिक वीडियो कॉल के लिए व्हाट्सएप मोबाइल ऐप के साथ सक्षम मोबाइल हैंडसेट की व्यवस्था करेंगे और जिन मोबाइल नंबरों का उपयोग वीडियो काॅलिंग के लिए किया जाएगा,उनके बारे में सूचना हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर ड़ाली जाए और संबंधित पक्षकारों को भी सूचित किया जाए।

रजिस्ट्रार कंप्यूटर यह भी सुनिश्चित करें कि तकनीकी कर्मचारी वीडियो कॉल के संचालन के लिए उपलब्ध रहें।

-संबंधित अधिवक्ता/मुविक्कल यह सुनिश्चित करेंगा कि जिस कमरे से वह वीडियो कॉल के माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना चाहता है, वह सभी तरह के बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त हो जैसै बाहरी शोर, खराब रोशनी, अनुचित ध्वनि आदि।

-चूंकि वीडियो कॉल के माध्यम से की जाने वाली कार्यवाही न्यायिक कार्यवाही के रूप में आयोजित की जाएगी, इसलिए न्यायालय में न्यायिक कार्यवाही के दौरान जिन शिष्टाचार और प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है,उन सभी का पालन ऐसी सुनवाई में भी किया जाए।

न्यायिक कार्यवाही के लिए लागू सभी प्रासंगिक वैधानिक प्रावधान ऐसी सुनवाई में भी लागू होंगे।

-मुकदमेबाज/अधिवक्ता को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति को उस कमरे में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी जहाँ से मुविक्कल/अधिवक्ता वीडियो कॉल के माध्यम से पेश हो रहे हों।

यदि मुविक्कल/ अधिवक्ता की राय में किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थिति बहुत जरूरी /अपरिहार्य है, तो इसके लिए कोर्ट से जरूरी अनुमति लेनी होगी।

-जिस एडवोकेट/मुविक्कल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/ कॉल के माध्यम से सुनवाई की अनुमति दी जाएगी, उसे ऐसी सुनवाई शुरू होने के तय समय ये कम से कम 30 मिनट पहले उपलब्ध और तैयार रहना होगा और कोर्ट /वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में ऐसी सुनवाई के लिए लगाए गए डिवाइस को छोड़कर किसी अन्य रिकॉर्डिंग डिवाइस की अनुमति नहीं होगी।

-वर्तमान आकस्मिक स्थिति और सामाजिक दूरी की अत्यधिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, जहां भी संभव हो मामलों में पेश होने वाले वकील को उनके स्वयं के कार्यालयों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है।

हाईकोर्ट ने यह भी निर्णय लिया है कि अदालत के कर्मचारी रोटेशन के आधार पर काम करेंगे,जिसके लिए न्यूनतम कर्मचारियों के बैच बनाए जाएं। वहीं राज्य न्यायिक अकादमी में सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम 31 मार्च तक निलंबित रहेंगे।

सभी अधीनस्थ न्यायालयों को भी, केस सूचीबद्ध करने या आवश्यक मामलों को सुनने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/ कॉलिंग के लिए इसी तरह के निर्देश जारी किए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, सभी सिविल मामलों के लिए दो विशेष दिशा-निर्देश पारित किए गए हैं-

1-अंतरिम निषेधाज्ञा के आदेश, जहां भी लागू हैं, अगली तारीख तक बढ़ाए जाएंगे जैसा कि वेबसाइट पर अधिसूचित है।

2-वेबसाइट पर अधिसूचित सूचना के अनुसार किसी भी पक्षकार या व्यक्ति की व्यक्तिगत उपस्थिति अगली तारीख तक स्थगित मानी जाएगी।

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