Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

"अपना ई मेल चेक न करके स्कूल ने चूक की" : दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूल को याचिकाकर्ताओं की एक माह की ट्यूशन फीस माफ करने का निर्देश दिया

LiveLaw News Network
14 Aug 2020 5:20 PM GMT
अपना ई मेल चेक न करके स्कूल ने चूक की : दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूल को याचिकाकर्ताओं की एक माह की ट्यूशन फीस माफ करने का निर्देश दिया
x
Clear Lapse By The School In Not Accessing Their E-Mails': Delhi HC Directs School To Waive Off One Month's Tution Fee Of Contempt Petitioners

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में दिल्ली के पश्चिम विहार में रिचमंड ग्लोबल स्कूल को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं के एक महीने की ट्यूशन फीस माफ कर दे, जिन्हें उक्त मामले में न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद ऑनलाइन कक्षा में शामिल होने से वंचित कर दिया गया था।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह की पीठ ने पाया कि चूक स्कूल के ईमेल चेक नहीं करने के कारण हुई, जिसके कारण न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से ऑनलाइन कक्षाओं में उपस्थित होने की अनुमति देने का आदेश दिया।

पीठ ने कहा,

"पक्षों की प्रस्तुतियां सुनने के बाद, इस पूरी अवधि के दौरान स्कूल द्वारा अपने ई-मेल तक नहीं पहुंचने और इस न्यायालय द्वारा पारित आदेश का अनुपालन नहीं करने के लिए स्कूल की स्पष्ट चूक प्रतीत होती है।"

यह कहा गया कि

"यह देखते हुए कि याचिकाकर्ताओं को याचिका दायर करने के लिए मजबूर किया गया, शुरू में एक रिट याचिका दायर की और उसके बाद एक अवमानना ​​याचिका दायर की, स्कूल याचिकाकर्ताओं का एक महीने का शिक्षण शुल्क माफ करेगा।"

न्यायालय दो छात्रों द्वारा दायर एक अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्कूल ने पिछले आदेश का अनुपालन नहीं किया है, जिसके तहत एकल न्यायाधीश की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को ऑनलाइन क्लास में उपस्थित होने की अनुमति देने के लिए स्कूल को निर्देशित किया था और उन्हें बकाया शुल्क के बारे में भी बताया था।

अदालत ने बताया,

"नोटिस जारी किए जाने और स्कूल के ई-मेल पर दिए गए आदेश के बावजूद, याचिकाकर्ताओं को ऑनलाइन कक्षाओं में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई थी। याचिकाकर्ताओं को बकाया फीस के बारे में भी सूचित नहीं किया गया था।"

स्कूल से पूछताछ पर यह खुलासा हुआ कि ईमेल एक्सेस नहीं किए गए थे क्योंकि मार्च 2020 से स्कूल में कोई निजी सचिव नहीं था और प्रिंसिपल अपने पिता के देहांत के कारण अनुपलब्ध थे।

हालांकि अदालत इस बात से निराशा व्यक्त की कि स्कूल के अपने ईमेल एक्सेस नहीं करने के कारण दो बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन अदालत ने प्रिंसिपल के साथ सहानुभूति जताई और निम्नलिखित निर्देशों के साथ अवमानना ​​कार्यवाही बंद कर दी :

* स्कूल याचिकाकर्ताओं का एक महीने का शिक्षण शुल्क माफ करेगा।

* यदि छात्रों की कोई परीक्षा या टेस्ट छूट गया है, तो स्कूल छात्रों के लिए रि टेस्ट आयोजित करने के लिए उचित व्यवस्था करेगा ताकि उन्हें किसी भी तरह से नुकसान न हो।

* अन्य छात्रों को दी जाने वाली सभी पाठ्यक्रम सामग्री भी एक सप्ताह की अवधि के भीतर याचिकाकर्ताओं को दी जाएगी।

आदेश की प्रति डाउनलोड करेंं


Next Story