छात्र प्रदर्शन के दौरान हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की समिति से मेघालय के पूर्व DGP ने दिया इस्तीफा

  • छात्र प्रदर्शन के दौरान हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की समिति से मेघालय के पूर्व DGP ने दिया इस्तीफा

    छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय जांच समिति के सदस्य और मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ. एलआर बिश्नोई ने इस्तीफा दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। गौरतलब है कि याचिकाकर्ताओं ने पहले भी समिति के गठन और उसके सदस्यों की नियुक्ति पर सवाल उठाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने समिति का पुनर्गठन करने से इनकार किया था।

    10 सितंबर को सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दलील दी थी कि समिति के एक सदस्य, पूर्वोत्तर राज्य के पूर्व डीजीपी, का संभावित हितों का टकराव है। उन्होंने कहा था कि समिति के सदस्य एक ऐसे वरिष्ठ अधिकारी के करीबी मित्र हैं, जिनकी जांच की जा सकती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस हिंसा और कथित ज्यादतियों की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था। यह समिति दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक तथा अन्य कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के आरोपों की जांच कर रही है।

    समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी को सौंपी गई थी। इसके अन्य सदस्यों में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जस्टिस जस्टिस शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और डॉ. एलआर बिश्नोई शामिल है।

    सुप्रीम कोर्ट ने समिति को पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच करने का निर्देश दिया था। इसमें पैलेट गन, बिजली के डंडों, लाठीचार्ज और आंसू गैस के कथित इस्तेमाल के साथ-साथ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी शामिल थे।

    कोर्ट ने समिति को समय-समय पर अंतरिम निष्कर्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ लक्षित हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों को प्राथमिकता के आधार पर जांचने को कहा था।

    10 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने समिति के गठन पर उठाई गई आपत्तियों के बावजूद उसका पुनर्गठन करने से इनकार किया। कोर्ट ने इन आरोपों को समय से पहले की गई आशंकाएं और पूर्वधारणाओं पर आधारित बताया।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए समिति को निर्देश दिया कि वह संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनकी पहचान तथा बयानों की गोपनीयता बनाए रखे।

    बाद में सुप्रीम कोर्ट ने समिति की स्थिति रिपोर्ट पर भी संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में बताया गया कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) शिकायत पोर्टल तैयार कर रहा है और पोर्टल शुरू करने के लिए तैयार है। इसके लिए दो अलग-अलग प्रारूप तैयार किए गए थे एक प्रभावित प्रदर्शनकारियों के लिए और दूसरा प्रभावित पुलिसकर्मियों के लिए।

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