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बॉम्बे हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास में भाजपा विधायक नितेश राणे को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया

LiveLaw News Network
17 Jan 2022 8:22 AM GMT
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास में भाजपा विधायक नितेश राणे को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को सिंधुदुर्ग में दर्ज हत्या के प्रयास के एक मामले में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बेटे भाजपा विधायक नितेश राणे को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने से इनकार कर दिया।

जस्टिस सीवी भडांग ने शुक्रवार को राणे की याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने राणे के साथ उनके सह-आरोपी संदेश उर्फ ​​गोत्या स्वंत को भी गिरफ्तारी से पहले जमानत देने से इनकार कर दिया।

वहीं आरोपी मनीष दलवी को अग्रिम जमानत दे दी गई।

कंकावली पुलिस ने राणे और अन्य के खिलाफ दिसंबर 2022 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307, 120 (बी) के साथ 34 के तहत मामला दर्ज किया है। सिंधुदुर्ग की एक सत्र अदालत द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद राणे ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

राणे के वकील ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के आदेश पर दो हफ्ते की रोक लगाने की मांग की। हाईकोर्ट आगे की सुनवाई के दौरान इस संबंध में निर्णय लेगा।

राणे के खिलाफ मामला संतोष परब (44) की शिकायत पर आधारित है। उसने आरोप लगाया कि जब वह कंकावली में नरवदे नाका से बाइक पर जा रहा था, बिना नंबर प्लेट वाली एक इनोवा कार ने उसकी मोटरसाइकिल को टक्कर मारी और अपने साथ उसे 50 फीट से अधिक दूरी तक खींचती चली गई। इसके बाद हमलावर ने सतीश सावंत नाम के एक व्यक्ति के साथ काम करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी।

परब ने कहा कि उस व्यक्ति ने उसे मारने का प्रयास किया और उसके सीने में छुरा घोंप दिया। इसके अलावा, उसने पुलिस को बताया कि उसने अपने हमलावर को कथित तौर पर यह कहते सुना कि उसे (हमलावर) गोत्या सावंत और नितेश राणे को सूचित करना चाहिए।

नितेश राणे का अधिवक्ता नितिन प्रधान द्वारा प्रतिनिधित्व किया गया। उन्होंने प्रस्तुत किया कि उन्हें सिंधुदुर्ग जिला सहकारी बैंक चुनावों में भाग लेने से रोकने के लिए एफआईआर दर्ज की गई है। यह चुनाव 30 दिसंबर, 2021 को होने वाले थे। उन्होंने विधानसभा भवन के बाहर कैट-कॉलिंग घटना का हवाला दिया, जब शिवसेना नेताओं ने कथित तौर पर कहा था कि राणे को सबक सिखाया जाएगा।

पुलिस के लिए विशेष लोक अभियोजक सुदीप पासबोला ने राणे को "मास्टरमाइंड" बताते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि राणे अब गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने प्रस्तुत किया कि राणे की हिरासत की आवश्यकता पैसे के रौब को रोकने के लिए आवश्यक है, जिसके द्वारा हमलावरों को हमले के लिए काम पर रखा गया था।

पासबोला ने इस बात पर जोर दिया कि राणे ने अपने करीबी विश्वासपात्र सचिन सतपुते से अपने नंबर से संपर्क नहीं किया बल्कि अपने सहायक राकेश परब के फोन का इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी राणे किराए के गुंडों से जुड़े कम से कम छह अन्य मामलों में शामिल है।

उन्होंने कहा,

"इसी तरह के तौर-तरीकों का इस्तेमाल अन्य मामलों में भी किया गया।"

अभियोजक ने तर्क दिया कि मामला कथित कैट-कॉलिंग घटना का परिणाम नहीं था, क्योंकि सचिन सतपुते की गिरफ्तारी के बाद ही साजिश का पता चला था।

कथित हत्या का प्रयास पिछले साल 18 दिसंबर को हुआ था। नितेश को 21 दिसंबर को नोटिस जारी किया गया था और 24 दिसंबर को उसका बयान दर्ज किया गया था।

राणे की ओर से दलील देते हुए प्रधान ने कहा कि बैंक चुनावों के लिए हत्या के प्रयास के आरोप काल्पनिक हैं। इसके अलावा, जब अगस्त में वैनिटी वैन में साजिश रचने का आरोप लगाया गया था, तब बैंक चुनाव की तारीखों की घोषणा भी नहीं की गई थी।

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