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"इस याचिका को सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए दायर किया गया है": परमवीर सिंह और अनिल देशमुख के खिलाफ जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा

LiveLaw News Network
30 March 2021 11:55 AM GMT
इस याचिका को सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए दायर किया गया है: परमवीर सिंह और अनिल देशमुख के खिलाफ जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर की गई डॉ. जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल की याचिका प्रथम दृष्टया एक सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए दायर की गई लगती है।

न्यायमूर्ति एसएस शिंदे ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा,

"हमारी यह राय है कि इस तरह की याचिकाएं सस्ते प्रचार के लिए दायर की जाती हैं।"

पीठ ने पाटिल की याचिका पर सुनवाई की शुरुआत से नाराजगी जाहिर की और कहा,

"आप कहते हैं कि आप अपराधशास्त्र में डॉक्टरेट हैं, लेकिन कृपया हमें आपके द्वारा तैयार एक ही पैराग्राफ दिखाएं। आपकी पूरी याचिका एक पत्र से पैराग्राफ निकालने पर आधारित है।"

अदालत ने कहा कि पाटिल की याचिका की सामग्री मुख्य रूप से उस पत्र पर आधारित है, जो मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखा था, जिसमें राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए थे।

पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा,

"याचिका में आपका क्या योगदान है? आपकी मूल दलीलें क्या हैं? आपका नजरिया क्या है?"

इसके बाद जस्टिस शिंदे ने पूछा कि कोर्ट के असाधारण क्षेत्राधिकार का आह्वान करके यह याचिका क्यों दायर की गई है।

इस पर पाटिल ने जवाब दिया कि उन्होंने अदालत के असाधारण क्षेत्राधिकार का आह्वान नहीं किया है। कुछ देर बाद ही उन्हें इसका एहसास हुआ।

अपने नजरिये के बारे में पाटिल ने कहा कि वह पहले पुलिस के पास शिकायत लेकर गई थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा, जब सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो उन्हें एक हस्तेक्षेपकर्ता माना गया।

अदालत ने तब एडवोकेट जनरल आशुतोष कुंभकोनी से पाटिल की शिकायत की स्थिति पूछी।

उन्होंने कहा,

"शिकायत लंबित है, लेकिन यह बहुत ही शालीनता से तैयार याचिका है। यहां तक ​​कि फ़ॉन्ट का आकार भी अलग है। मैं इस पहलू पर सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसले पढ़ना चाहता हूं।"

पीठ ने जानना चाहा कि क्या अन्य याचिकाएं उसी मुद्दे पर लंबित हैं। इस पर एजी ने अदालत को सूचित किया कि प्रधान न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली एक खंडपीठ बुधवार को परमबीर सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी।

एजी ने प्रस्तुत किया,

"अन्य याचिकाएं भी हैं।"

पीठ ने तब सुझाव दिया कि एजी विरोधाभासी आदेशों से बचने के लिए अन्य लंबित रिट याचिकाओं को क्लब करने के लिए आवेदन कर सकते हैं और मामले को सुनवाई के लिए गुरुवार को पोस्ट कर सकते हैं।

पृष्ठभूमि

पाटिल ने 23 मार्च को सीबीआई, ईडी या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी द्वारा परमबीर सिंह के पत्र की जांच की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

उसने कहा है कि परमबीर सिंह के खिलाफ भी जांच होनी चाहिए। साथ ही यह मानते हुए कि वह एक साल के लिए मुंबई पुलिस आयुक्त थे, लेकिन इस तरह के जघन्य अपराध को आगे लाने में विफल रहे।

भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए दो अन्य समान याचिकाएँ लंबित हैं। उनमें से एक पुणे स्थित एक कार्यकर्ता ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और परम बीर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और अदालत की निगरानी में जांच की मांग की है।

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