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शरद पवार के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक पोस्ट करने का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने फार्मेसी छात्र की गिरफ्तारी पर राज्य की खिंचाई की

Brij Nandan
14 Jun 2022 5:36 AM GMT
शरद पवार के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक पोस्ट करने का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने फार्मेसी छात्र की गिरफ्तारी पर राज्य की खिंचाई की
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को एनसीपी (NCP) अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक पोस्ट करने के लिए 21 वर्षीय एक छात्र की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की और राज्य से पूछा कि क्या वह उसकी रिहाई के लिए "नो ऑब्जेक्शन" देगी।

जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एमएन जाधव की पीठ ने अभियोजक से इस मामले के संबंध में गृह विभाग से निर्देश लेने को कहा। और कहा कि अगर वे स्वेच्छा से उसकी रिहाई का विरोध नहीं करने का फैसला करते हैं तो राज्य की कृपा बच जाएगी।

कोर्ट एक फार्मेसी छात्र निखिल भामरे द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसके खिलाफ पोस्ट करने पर दर्ज मामलों को चुनौती दी गई थी और तत्काल रिहाई की मांग की गई थी।

सोमवार को पीठ ने कहा कि पवार भी एक छात्र को एक महीने से अधिक समय तक जेल में रखने की मंजूरी नहीं देंगे। पीठ ने हालांकि पवार के नाम का जिक्र नहीं किया।

पीठ ने कहा,

"यदि आप इस तरह की कार्रवाई करना शुरू करते हैं, तो आप उस व्यक्ति के नाम को नुकसान पहुंचाएंगे, जिसने दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार (पद्म विभूषण) प्राप्त किया है। [यह अनसुना है कि किसी छात्र को इस तरह हिरासत में रखा जाता है। इतनी बड़ी शख्सियत को भी पसंद नहीं आएगा कि ऐसे छात्र को जेल में रखा जाए।"

अदालत इस बात से नाराज़ थी कि सारी कार्रवाई एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर की गई है, जिसमें राजनीतिक नेता का नाम तक नहीं था।

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा,

"हर दिन सैकड़ों और हजारों ट्वीट पोस्ट किए जाते हैं। क्या आप हर ट्वीट पर संज्ञान लेंगे? हम इस तरह की प्राथमिकी नहीं चाहते हैं।"

जस्टिस शिंदे ने कहा,

"किसी का नाम नहीं है। और आप (राज्य) किसी को एक महीने के लिए जेल में रखते हैं। इन सबका आधार क्या है?"

अदालत ने इसके बाद मामले को 16 जून को आगे की सुनवाई के लिए पोस्ट किया, अभियोजक को गृह विभाग से निर्देश लेने और भामरे को हिरासत से रिहा करने के लिए नो ऑब्जेक्शन का बयान देने का निर्देश दिया।



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