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बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने जिला कलेक्टरों से पूछा-क्या प्रवासी मजदूरों की मनोवैज्ञानिक सहायता के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं

LiveLaw News Network
17 April 2020 9:05 AM GMT
बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने जिला कलेक्टरों से पूछा-क्या प्रवासी मजदूरों की मनोवैज्ञानिक सहायता के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं
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बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी जिला कलेक्टरों से पूछा है कि उनके अधिकार क्षेत्रों में फंसे प्रवासी मजूदरों की मनोचिकित्सकीय सहायता के लिए स्थानीय प्रशासन ने कोई प्रयास किया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रवासी मजदूरों को मानसिक आघात न हो या वे कोई घातक कदम न उठा लें।

उल्लेखनीय है कि 14 अप्रैल को बांद्रा और मुंब्रा में सैकड़ों की संख्या में मजदूर सड़कों पर उतर आए थे अपने घर भेजे जाने की मांग करने लगे। पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया था। बाद में लॉकडाउन का उल्लंघन करने के आरोप में कई प्रवासी मजदूरों को गिरफ्तार किया गया। उन घटनाओं की पृष्ठभूमि में जस्टिस आरवी घुगे का निर्देश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एमिकस क्यूरी अमोल जोशी ने कोर्ट को बताया कि ऐसी ही एक याचिका बांबे हाईकोर्ट की मुख्य पीट पर भी दाखिल की गई है,‌ जिनमें उस पीठ के अधिकार क्षेत्र में आने वाले जिलों को शामिल किया गया है। उन्होंने औरंगाबाद पीठ के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी जिलों के जिला कलेक्टरों को जोड़ने का निवेदन किया।

कोर्ट ने जिला कलेक्टरों से निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर मांगे थे-

(क) इन जिलों में फंसे प्रवासी मजदूरों की संख्या।

(ख) क्या जिलों में ऐसे प्रवासी मजदूरों, जो लॉकडाउन के कारण अपने घर लौटने में असमर्थ हैं, की देखभाल के लिए कोई आश्रय गृह है।

(ग) क्या स्थानीय प्रशासन ने प्रवासी मजदूरों की मनोवैज्ञानिक सहायता के ‌लिए कोई प्रयास किए हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें मानस‌िक आघात न हो या वो कई घातक कदम न उठा लें।

पीठ ने सभी जिला कलेक्टरों को मामले में उत्तरदाता के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया। साथ ही सरकारी वकील डीआर काले को जिला कलेक्टरों को उपरोक्त मुद्दों का डाटा तैयार करने का निर्देश देने के लिए कहा है। डाटा इकट्ठा करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।

कोर्ट ने एमिकस क्यूरी और सरकारी वकील काले को उन समाचार रिपोर्टों पर ध्यान देने के लिए कहा, जिनमें दावा किया गया है कि कोरोनावायरस के संद‌िग्धों की जांच और उपचार में शामिल डॉक्टर, मेडिकल और पैरा मेडिकल स्टाफ को परेशान किया जा रहा हैं।

सरकारी वकील काले ने अदालत को आश्वासन दिया कि स्थानीय प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि COVID-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में शामिल डॉक्टरों, मेडिकल और पैरा मेडिकल स्टाफ को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए।

मामले की अगली सुनवाई कोर्ट खुलने के पहले दिन होगी या 4 मई के बाद होगी।

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