भीमा कोरेगांव मामले पर मीडिया बयान नहीं देंगे वरवर राव: एनआईए कोर्ट ने जमानत की शर्तें तय की
Sharafat
20 Aug 2022 2:12 PM IST

मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी तेलुगु कवि डॉ पी वरवर राव के लिए जमानत की 14 शर्तें तय कीं, जिसमें किसी भी मीडिया फोरम पर मामले के बारे में बात करने पर प्रतिबंध भी शामिल है।
राव को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल आधार पर जमानत दी थी।
विशेष न्यायाधीश राजेश कटारिया ने कहा,
"वह इस मामले में किसी भी तरह के मीडिया यानी प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया आदि के संबंध में कोई बयान नहीं देंगे। वह समान या किसी अन्य प्रकृति का कोई अन्य अपराध नहीं करेंगे। "
अदालत ने उन्हें हर पखवाड़े व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करने और हर तीन महीने में पुलिस स्टेशन में पेश होने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त को राव को मेडिकल आधार पर जमानत दी थी और शर्त लगाई थी कि वह ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना ग्रेटर मुंबई क्षेत्र को नहीं छोड़ेंगे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 17 अगस्त 2022 को राव को हैदराबाद में मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत में जाने की अनुमति दी।
जमानत की शर्तें इस प्रकार हैं-
1. आवेदक/अभियुक्त को दो सॉल्वेंट ज़मानतदार के साथ रु. 50,000/- का नया पीआर बांड प्रस्तुत करना होगा। यदि पहले के जमानतदार आते हैं तो उन्हें इस संबंध में नए दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे और ज़मानत को नए सिरे से सत्यापन के लिए रखना होगा।
2. ग्रेटर मुंबई के क्षेत्र में रहें और न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना मुंबई नहीं छोड़ेंगे।
3. उनके निवास का विस्तृत पता और उनके 3 निकट संबंधी तथा उनके साथ रहने वाले व्यक्ति के कॉन्टैक्ट नंबर प्रस्तुत करें।
4. जब तक व्यक्तिगत पेशी से छूट की अनुमति न हो, ट्रायल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही में भाग लें।
5. तीन महीने की अवधि में एक बार शारीरिक रूप से और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से पाक्षिक रूप से निकटतम पुलिस स्टेशन को रिपोर्ट करें।
6. मीडिया के किसी भी रूप यानी प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया आदि में मामले के संबंध में कोई बयान न दें।
7. वह समान या किसी अन्य प्रकृति का कोई अन्य अपराध नहीं करेंगे।
8. किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे जिसके संबंध में आवेदक के खिलाफ वर्तमान अपराध दर्ज किया गया है।
9. सह-अभियुक्त या समान गतिविधियों में शामिल किसी अन्य व्यक्ति के साथ संवाद नहीं करेंगे।
10. वह संचार के किसी भी माध्यम से समान गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को घरेलू या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई कॉल नहीं करेंगे।
11. वह व्यक्तिगत रूप से या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से अभियोजन पक्ष के गवाहों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे।
12. वह फरार नहीं होंगे या न्याय से भागने की कोशिश नहीं करेंगे।
13. जहां आवेदक ग्रेटर मुंबई में निवास करेंगे, वहां आजे जाने वालों का कोई जमावड़ा नहीं होगा।
14. आवेदक को अपना पासपोर्ट इस न्यायालय के समक्ष सरेंडर करना होगा यदि पहले सरेंडर नहीं किया गया है।
राव को इस मामले में चार साल पहले 28 अगस्त, 2018 को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें नवंबर 2018 में मुंबई की तलोजा जेल ले जाया गया था। साल 2021 में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। फरवरी 2021 में हाईकोर्ट ने उन्हें 6 महीने की मेडिकल जमानत दी थी। समय-समय पर मेडिकल जमानत की अवधि बढ़ाई जाती रही। हालांकि, इस साल 13 अप्रैल को हाईकोर्ट ने उन्हें स्थायी जमानत देने से इनकार कर दिया और मेडिकल जमानत को अस्थायी रूप से तीन और महीने बढ़ा दिया। उन्हें तीन महीने की अवधि के बाद जेल में आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अंततः उनकी एसएलपी पर आदेश जारी करने से पहले अस्थायी जमानत की अवधि बढ़ा दी।
केस टाइटल : विश्रामबाग पुलिस स्टेशन बनाम सुधीर प्रहलाद धवले और अन्य
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