केंद्रीय सूचना आयोग का बड़ा फैसला: RTI Act के दायरे में नहीं आता BCCI
Amir Ahmad
18 May 2026 5:13 PM IST

केंद्रीय सूचना आयोग ने अहम फैसले में कहा कि भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) सूचना का अधिकार कानून 2005 (RTI Act) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है। इसलिए BCCI को RTI Act के तहत जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
सूचना आयुक्त पी. आर. रमेश ने दिल्ली निवासी गीता रानी की दूसरी अपील खारिज करते हुए यह आदेश दिया। गीता रानी ने यह जानकारी मांगी थी कि BCCI किस कानूनी अधिकार के तहत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करता है और भारतीय टीम के खिलाड़ियों का चयन करता है।
मामले की शुरुआत 2017 में दायर एक RTI आवेदन से हुई थी। इसमें युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय से पूछा गया था कि BCCI को भारतीय टीम चुनने का अधिकार किस आधार पर मिला है क्रिकेट आयोजनों के लिए सरकारें सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं क्यों उपलब्ध कराती हैं, और क्या किसी सरकारी संस्था का BCCI पर कानूनी नियंत्रण है।
मंत्रालय ने जवाब में कहा था कि मांगी गई जानकारी उसके पास उपलब्ध नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि आवेदन BCCI को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसने खुद को RTI Act के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित नहीं किया।
इससे पहले 2018 में तत्कालीन सूचना आयुक्त एम. श्रीधर आचार्युलु ने BCCI को सार्वजनिक प्राधिकरण माना था और उसे केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी नियुक्त करने तथा RTI Act की धारा 4 के तहत सूचनाएं सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। हालांकि BCCI ने इस फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सितंबर 2025 में मामले को दोबारा विचार के लिए केंद्रीय सूचना आयोग को भेज दिया था।
मामले पर नए सिरे से सुनवाई करते हुए आयोग ने कहा कि RTI Act की धारा 2(एच) में दी गई सार्वजनिक प्राधिकरण की परिभाषा में BCCI नहीं आता।
आयोग ने कहा कि BCCI न तो संविधान के तहत स्थापित संस्था है, न संसद या राज्य कानून के जरिए बनाई गई है और न ही किसी सरकारी अधिसूचना या आदेश से गठित हुई। आयोग ने स्पष्ट किया कि BCCI केवल तमिलनाडु सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत एक संस्था है। किसी कानून के तहत पंजीकरण का मतलब यह नहीं कि वह कानून द्वारा स्थापित निकाय बन जाती है।
आयोग ने अपने फैसले में कई सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया, जिनमें थालाप्पलम सर्विस कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड बनाम केरल राज्य, डाल्को इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड बनाम सतीश प्रभाकर पाध्ये और ज़ी टेलीफिल्म्स लिमिटेड बनाम भारत संघ शामिल हैं।
आयोग ने कहा कि केवल नियामकीय निगरानी या सार्वजनिक महत्व होने से कोई निजी संस्था RTI Act के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं बन जाती।
सरकारी नियंत्रण के सवाल पर आयोग ने कहा कि RTI Act के तहत पर्याप्त नियंत्रण जरूरी है केवल निगरानी या विनियमन पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
आयोग ने कहा,
“यह उल्लेखनीय है कि BCCI में सरकार या किसी वैधानिक निकाय का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। BCCI के कार्यों, वित्त, प्रशासन, प्रबंधन और मामलों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।”
वित्तीय सहायता के मुद्दे पर आयोग ने माना कि BCCI मीडिया अधिकार, प्रायोजन, टिकट बिक्री और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और उसे अपने संचालन के लिए सरकारी फंडिंग पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
आयोग ने यह भी कहा कि कर छूट या बुनियादी ढांचे जैसी सुविधाएं पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मानी जा सकतीं, जब तक संस्था का अस्तित्व उन्हीं पर निर्भर न हो।
भारतीय क्रिकेट टीम के चयन और देश में क्रिकेट संचालन जैसे सार्वजनिक कार्यों के तर्क पर आयोग ने कहा कि केवल सार्वजनिक कार्य करना किसी संस्था को RTI Act के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं बना देता।
आयोग ने कहा,
“RTI Act में 'सार्वजनिक कार्य' को सार्वजनिक प्राधिकरण तय करने का आधार नहीं बनाया गया।”
फैसले में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2016 के क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार मामले में BCCI के कार्यों के सार्वजनिक स्वरूप को जरूर स्वीकार किया था, लेकिन उसे RTI Act के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित नहीं किया था। आयोग के मुताबिक ऐसा कोई कदम केवल विधायी बदलाव के जरिए ही संभव है।
केंद्रीय सूचना आयोग ने हाल ही में लागू राष्ट्रीय खेल प्रशासन कानून, 2025 का भी जिक्र किया। आयोग ने कहा कि इस कानून में सरकारी अनुदान पाने वाले मान्यता प्राप्त खेल संगठनों को RTI Act के दायरे में लाया गया है, लेकिन BCCI सरकारी आर्थिक सहायता नहीं लेता, इसलिए यह कानून भी उस पर लागू नहीं होता।
आखिर में आयोग ने कहा कि अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर पाई कि BCCI सरकार के स्वामित्व, नियंत्रण या पर्याप्त वित्तीय सहायता के तहत काम करता है। इसी आधार पर अपील खारिज कर दी गई।

