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ITAT ने कहा, दिल्ली बार काउंसिल आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत छूट की हकदार

LiveLaw News Network
7 July 2020 9:36 AM GMT
ITAT ने कहा, दिल्ली बार काउंसिल आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत छूट की हकदार
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आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने माना है कि बार काउंसिल ऑफ दिल्ली आयकर अधिनियम की धारा 12 एए के तहत पंजीयन का हकदार है और परिणामस्वरूप धारा 80 जी के तहत छूट का हकदार है।

आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण की दिल्ली बेंच ने आयकर आयुक्त (छूट) की ओर से पारित एक आदेश को रद्द कर दिया, जिसने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 12AA के तहत पंजीयन की मांग की गई ‌थी।

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12AA एक चैरिटेबल ट्रस्ट या संस्था के पंजीकरण की प्रक्रिया से संबंधित है। चैरिटेबल ट्रस्ट को दिए गए योगदान पर आयकर अधिनियम की धारा 80 जी के तहत कटौती के रूप में दावा किया जा सकता है।

बार काउंसिल की अपील को अनुमति देते हुए, न्यायिक सदस्य कुलदीप सिंह और लेखाकार सदस्य आरके पांडा की पीठ ने कहा कि परिषद अधिवक्ताओं के अधिकारों, विशेषाधिकारों और हितों की सुरक्षा में लगी हुई है, और इसका मुख्य उद्देश्य अधिनियम की धारा 2 (15) के अर्थ में सामान्य सार्वजनिक उपयोगिता को आगे बढ़ाना है, और इस प्रकार इसकी गतिविधियों और चैरिटेबल उद्देश्य की सत्यता सिद्ध होती है।

ट्रिब्यूनल ने उल्लेख किया कि अधिनियम की धारा 12 एए के तहत पंजीकरण के लिए आधारभूत शर्त यह है कि संस्था के उद्देश्यों के खंड के साथ गतिविधियों की वास्तविकता तय की जाए।

ट्रिब्यूनल ने कहा, बार काउंसिल की स्थापना कानून के पेशे को नियंत्रित करने, पर्यवेक्षण करने, विनियमित करने या प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है, जिसके लिए अधिनियम में एक अलग प्रावधान है जैसा कि अधिनियम की धारा 10 (23 ए) में अपनी आय को छूट देने के लिए है, जो इसकी कुल आय में शामिल नहीं है।

सीआईटी (ई) ने दो आधारों पर आवेदन को खारिज कर दिया था, (i)वित्त वर्ष 2018-19 के वित्तीय दस्तावेजों के अभाव में, अपीलकर्ता की गतिविधियों की वास्तविकता स्थापित नहीं की जा सकी; और (ii) अपीलकर्ता भारत सरकार द्वारा अधिसूचित संस्थान नहीं है।

अपील पर विचार करते हुए, ट्रिब्यूनल ने उल्लेख किया कि एक सरकारी अधिसूचना है, जिसके जर‌िए बार काउंसिल अधिनियम की धारा 10 (23) के उद्देश्य से विधिवत अनुमोदित / अधिसूचित संस्था है। यह भी माना गया है कि सीआईटी (ई) ने अधिनियम की धारा 12 एए के तहत काउंसिल के पंजीकरण से इनकार करके गलती की है।

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