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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्षति की वसूली संबंधित नए अध्यादेश के खिलाफ दायर याचिका पर यूपी सरकार से जवाब मांगा

LiveLaw News Network
18 March 2020 3:13 PM GMT
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्षति की वसूली संबंधित नए अध्यादेश के खिलाफ दायर याचिका पर यूपी सरकार से जवाब मांगा
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के संपत्ति की क्षति की वसूली संबंधित नए अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर उत्तर प्रदेश राज्य को एक सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

रविवार को उत्तर प्रदेश सार्वजनिक तथा निजी सम्पत्ति क्षति वसूली अध्यादेश 2020 को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद इसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में मंगलवार को एक जनहित याचिका दायर की गई।

मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने कहा,

'' याचिका में निर्दिष्ट तथ्यों और आधारों पर विचार करने के बाद, हम उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा पर्याप्त प्रतिक्रिया देने के लिए जवाबी हलफनामा दायर करवाना उचित समझते हैं। 25 मार्च, 2020 को या उससे पहले याचिका पर अदालत में काउंटर हलफनामा प्रस्तुत करते हुए उसकी एक प्रति याचिकाकर्ता के वकील को आपूर्ति की जाएगी।"

अधिवक्ता शशांक त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि अध्यादेश संविधान के साथ की गई एक शरारत है। रविवार को जारी अध्यादेश में राजनीतिक जुलूस, प्रदर्शन, हड़ताल, बंद, दंगों और बलवों के दौरान सरकारी एवं निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर उपद्रवियों से वसूली के लिए बेहद कड़े प्रावधान किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने गत 13 मार्च को इस अध्यादेश प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। राज्य सरकार ने यह फैसला लखनऊ में 19 दिसम्बर को आयोजित सीएए विरोधी प्रदर्शनों में शामिल व्यक्तियों के नाम, फोटो एवं अन्य विवरणों वाली होर्डिंग लगाये जाने के खिलाफ याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के आलोक में किया है।

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