पर्याप्त सबूत नहीं मिले, कथित अल-कायदा सदस्य को कोर्ट ने किया बरी
Amir Ahmad
29 May 2026 5:52 PM IST

ओडिशा के कटक सेशन कोर्ट ने अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप शाखा और इंडियन मुजाहिदीन से कथित संबंध रखने वाले आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर सका।
सेशन जज मानस रंजन बरिक ने फैसले में कहा कि जांच अधिकारी ऐसा कोई दस्तावेज या सामग्री प्रस्तुत नहीं कर सके जिससे यह साबित हो कि आरोपी किसी प्रतिबंधित आतंकी संगठन का सदस्य था या उसने आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
अदालत ने कहा,
“जांच में ऐसा कुछ सामने नहीं आया जिससे यह साबित हो कि आरोपी मदरसे के छात्रों या किसी अन्य व्यक्ति को आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए उकसा रहा था। अभियोजन पक्ष धारा 16, 20 और 38 के तहत लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सामग्री पेश नहीं कर सका।”
मामला वर्ष 2015 का है।
आरोपी को जगतपुर पुलिस ने 17 दिसंबर 2015 को गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि वह विदेशी आतंकी संगठनों के संपर्क में रहकर देश विरोधी विचारधारा फैला रहा था और अपने मदरसे के छात्रों को कट्टरपंथी संगठनों में भर्ती कराने की कोशिश कर रहा था।
पुलिस ने यह भी दावा किया था कि आरोपी आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटा रहा था और 'अल-हरमैन' नाम से एक ट्रस्ट चलाता था, जिसके माध्यम से फंड का इस्तेमाल किया जाता था।
जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की कई धाराओं तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की राजद्रोह संबंधी धारा 124-ए के तहत आरोप तय किए गए।
हालांकि, विस्तृत सुनवाई और 46 गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अदालत ने पाया कि जांच एजेंसी आरोपी के खिलाफ धन के अवैध लेनदेन या आतंकी संगठनों को फंडिंग का कोई प्रमाण पेश नहीं कर सकी।
अदालत ने कहा,
“बैंक अधिकारियों या स्वतंत्र गवाहों की गवाही से यह साबित नहीं होता कि आरोपी या उसके ट्रस्ट के खातों से किसी गैरकानूनी उद्देश्य के लिए धन का इस्तेमाल हुआ।”
सेशन कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष मदरसे के किसी छात्र को गवाह के रूप में पेश नहीं कर सका, जबकि ऐसे गवाहों से यह स्पष्ट हो सकता था कि आरोपी किस प्रकार की शिक्षा या विचार छात्रों को दे रहा था।
फैसले में कहा गया,
“यदि ऐसे छात्रों को गवाह बनाया जाता तो मदरसे में दी जा रही शिक्षा की प्रकृति पर कुछ प्रकाश पड़ सकता था। मौजूदा साक्ष्य आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।”
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि जांच अधिकारी ऐसा कोई प्रमाण नहीं जुटा सके जिससे यह साबित हो कि आरोपी के किसी छात्र ने किसी प्रतिबंधित आतंकी संगठन में शामिल हुआ हो।
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को UAPA और IPC के तहत लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया।

