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अधिवक्ता महमूद प्राचा के कार्यालय पर पुलिस की छापेमारी : दिल्ली की अदालत ने छापेमारी की कार्रवाई के वीडियो फुटेज के साथ जांच अधिकारी को तलब किया

LiveLaw News Network
26 Dec 2020 2:45 AM GMT
अधिवक्ता महमूद प्राचा के कार्यालय पर पुलिस की छापेमारी : दिल्ली की अदालत ने छापेमारी की कार्रवाई के वीडियो फुटेज के साथ जांच अधिकारी को तलब किया
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दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली के दंगों से जुड़े मामलों से जुड़े एक जांच अधिकारी को समन जारी करके तलब किया है। साथ ही इस अधिकारी को दिल्ली पुलिस द्वारा वकील महमूद प्राचा के कार्यालय में छापेमारी की कार्रवाई के पूरे वीडियो फुटेज पेश करने को कहा गया है।

पटियाला हाउस कोर्ट में ड्यूटी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अंशुल सिंघल ने उक्त आदेश वकील महमूद प्राचा के उस आवेदन पर दिया जिसमें प्राचा ने गुरुवार को अपने कार्यालय में दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए छापेमारी के वीडियो फुटेज की प्रतियों को संरक्षित करने के लिए अनुरोध किया था।

प्राचा ने कहा कि उन्होंने ट्रायल कोर्ट के समक्ष सीआरपीसी की धारा 165 (5) और 156 (3) के तहत एक आवेदन दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष सीआरपीसी की धारा 93 के तहत एक आवेदन दायर किया है और आईओ को उक्त आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया था और आज यह मामला ड्यूटी एमएम के समक्ष रखा गया था।

सीआरपीसी की धारा 165 (5) में कहा गया है कि किसी पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी की स्थिति में, किए गए किसी भी रिकॉर्ड की प्रतियों को निकटतम मजिस्ट्रेट को भेजा जाएगा, जिसे अपराध का संज्ञान लेने के लिए सशक्त किया जाएगा, और तलाशी के स्थान के मालिक या कब्जाधारी के आवेदन पर पर उसे तलाशी की एक प्रति मुफ्त दी जाएगी।

यह नोट किया गया कि

"कोर्ट के सहायक रिकॉर्ड अधिकारी ने रिपोर्ट दी है कि उन्हें सीएमएम के कोर्ट से कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सीएमएम के कोर्ट के रीडर से संपर्क करने की कोशिश की है, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। आवेदक को कोई जवाब नहीं मिला है।"

इस अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया है कि उनके सहयोगी ने सीएमएम के न्यायालय के रिकॉर्ड अधिकारी से टेलीफोन पर बात की है और उन्होंने कहा है कि एमएम की अदालत में कल ही डाक चपरासी के माध्यम से आवेदन भेजा गया है।"

प्राचा ने अदालत को आगे सूचित किया कि तलाशी उनके कार्यालय में 24 दिसंबर को दोपहर 12 बजे से 25 दिसंबर को दोपहर 3 बजे तक और धारा 165 सीआरपीसी, खंड III, अध्याय II, भाग ए, नियम 14 और 16 के प्रावधानों के अनुसार की गई थी। जांच अधिकारी को संबंधित मजिस्ट्रेट को तलाशी और जब्त किए गए सामान की जानकारी देनी चाहिए।

हालांकि, उन्होंने प्रस्तुत किया कि ऐसा नहीं किया गया है और इसलिए, उन्होंने धारा 165 (5) के तहत उपरोक्त आवेदन दायर किया है। उन्होंने अदालत को बताया कि 22 दिसंबर के न्यायालय के आदेश के अनुसार पूरी तलाशी की वीडियोग्राफी की गई थी। उन्होंने प्रस्तुत किया कि वह वीडियो फुटेज की एक कॉपी प्राप्त करने के हकदार हैं।

जज ने कहा,

"आवेदक ने आगे कहा है कि एक श्री राजीव और आईओ ने उन्हें धमकी दी है कि वे उनके खिलाफ एक झूठा मामला बनाएंगे। तदनुसार, आवेदक ने मामले की निरंतर निगरानी के लिए धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत एक आवेदन दायर किया है।"

ड्यूटी मजिस्ट्रेड ने यह निर्देश दिया कि जांच अधिकारी तक धारा 165 (5) सीआरपीसी के तहत रविवार तक आवेदन का जवाब दे। आईओ को आगे आवेदक के कार्यालय परिसर में उसके द्वारा की गई किसी भी तलाशी के पूरे वीडियो फुटेज के साथ न्यायालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया।

न्यायाधीश ने आगे कहा कि जांच अधिकारी को 5 जनवरी तक मामलों के संबंध में स्थिति रिपोर्ट दर्ज करनी होगी।

आदेश की प्रति डाउनलोड करें




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