प्रतिकूल टिप्पणियों से बचें: अवध बार एसोसिएशन ने CJI से जस्टिस पंकज भाटिया पर टिप्पणी हटाने की मांग की
Amir Ahmad
19 Feb 2026 11:46 AM IST

अवध बार एसोसिएशन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) को औपचारिक प्रतिवेदन भेजकर इलाहाबाद हाइकोर्ट के जजों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जा रही प्रतिकूल टिप्पणियों पर गंभीर चिंता जताई। एसोसिएशन ने विशेष रूप से जस्टिस पंकज भाटिया के खिलाफ हाल में की गई टिप्पणी को वापस लेने और अभिलेख से हटाने की मांग की।
चार पृष्ठ के प्रतिवेदन में कहा गया कि हाइकोर्ट के जज पहले से ही लंबित मामलों के बढ़ते बोझ के कारण भारी दबाव में काम कर रहे हैं। ऐसे वातावरण में यदि अपीलीय अधिकार क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट की ओर से कठोर या कलंकित टिप्पणियां की जाती हैं तो उसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है।
प्रतिवेदन में कहा गया,
“कभी-कभी हमारे सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपील सुनते समय संबंधित जज की क्षमता पर की गई टिप्पणियां न्यायिक मन पर गंभीर झटका देने वाली होती हैं।”
आगे कहा गया कि ऐसी टिप्पणियां न केवल संबंधित जज का मनोबल गिराती हैं बल्कि बार के सदस्यों पर भी शीतल प्रभाव डालती हैं।
एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत से अनुरोध किया कि वे साथ बैठने वाले सभी जजों को सलाह दें कि वह इलाहाबाद हाइकोर्ट के जजों के संबंध में प्रतिकूल और कलंकित टिप्पणियों से बचें। साथ ही हाल में जस्टिस पंकज भाटिया के खिलाफ की गई टिप्पणी की समीक्षा कर उसे अभिलेख से हटाया जाए।
उल्लेखनीय है कि 9 फरवरी सुप्रीम कोर्ट ने एक दहेज मृत्यु मामले में पारित जमानत आदेश की कड़ी आलोचना की थी।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने जस्टिस पंकज भाटिया द्वारा पारित आदेश को सबसे चौंकाने और निराशाजनक आदेशों में से एक बताया था, क्योंकि उसमें जमानत के लिए आवश्यक पहलुओं पर विचार नहीं किया गया।
इस टिप्पणी के चार दिन बाद जस्टिस भाटिया ने आदेश पारित कर चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि भविष्य में उन्हें जमानत मामलों की सूची न सौंपी जाए।
अवध बार एसोसिएशन का कहना है कि पारदर्शी, निडर और स्वतंत्र न्याय व्यवस्था बनाए रखने के लिए हाइकोर्ट के जजों का मनोबल और कार्यक्षमता उच्च बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

