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'क्रूरता की सुनामी' कहते हुए पंजाब और हरियाणा HC ने गैंगरेप और हत्या के 7 दोषियों की मौत की सजा की पुष्टि की, 50 लाख का जुर्माना भी लगाया [निर्णय पढ़े]

Live Law Hindi
21 March 2019 12:17 PM GMT
क्रूरता की सुनामी कहते हुए पंजाब और हरियाणा HC ने गैंगरेप और हत्या के 7 दोषियों की मौत की सजा की पुष्टि की, 50 लाख का जुर्माना भी लगाया [निर्णय पढ़े]
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“यदि वे (अभियुक्त) संयुक्त रूप से और व्यक्तिगत रूप से अपराध करने के लिए एक साथ आए थे और उनमें से किसी ने भी एक-दूसरे का विरोध नहीं किया था। हमें लगता है कि अजीबोगरीब तथ्यों और परिस्थितियों के तहत 50 लाख की राशि के भुगतान करने की देयता संयुक्त और कठोर होनी चाहिए।”

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मानसिक रूप से बीमार महिला से सामूहिक बलात्कार के आरोपी 7 लोगों की मौत की सजा की पुष्टि की है। अपराध को 'पशुता' और 'क्रूरता की सुनामी' के रूप में वर्णित करते हुए, न्यायमूर्ति ए. बी. चौधरी और न्यायमूर्ति सुरिंदर गुप्ता की पीठ ने आरोपियों पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जिसे उनसे संबंधित अचल संपत्ति जैसे प्लॉट, घर, कृषि भूमि आदि को संलग्न/बेचकर वसूला जाना है।

पीठ ने सुनील @ मादा, सुनील @ शीला, सरवर @ बिल्लू, पवन, पदम @ प्रमोद, मनबीर @ मन्नी और राजेश @ घोचरू के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा की पुष्टि की है।

पशुता, क्रूरता की सूनामी की अभियोजन पक्ष की बात से सहमत पीठ ने माना कि यह मामला 'निर्भया' के मामले जैसा है और पीठ आश्वस्त है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा सभी अभियुक्तों के लिए मौत की सजा ही एकमात्र ऐसी सजा है जिसे सुनाया जा सकता था।

इस केस को दुर्लभतम से भी दुर्लभ (Rarest of the rare) मानते हुए पीठ ने कहा:

"एक मानसिक रूप से बीमार महिला जो रोहतक शहर के बाहरी इलाके में स्थित अपनी बहन के घर से निकली थी और उसने खुले क्षेत्र की ओर चलना शुरू कर दिया था कि तभी अभियुक्तों द्वारा उसे जबरन रोका गया और उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाया गया।"

दो स्थानों पर अभियुक्तों द्वारा एक के बाद एक उसके साथ बलात्कार किया गया था। अपीलकर्ताओं/अभियुक्तों ने शराब का सेवन भी किया था। पुलिस की जीप के गुजरने के डर से उन्होंने मौके को बदल दिया। उन्होंने उस महिला को मैदान में धकेल दिया और उसे ईंटों से मारना शुरू कर दिया।

राजेश @ घोचरू ने फिर उसके साथ बलात्कार किया और उसे फिर से ईंटों से मारा। वह अभी भी जीवित थी। लगभग आधी मृत युवती की पीड़ा कितनी कष्टदायी रही होगी! उसके पश्च्यात उस महिला के साथ की गयी 'पशुता', उसे पहुचाई गयी पीड़ा, क्रूरता का उच्चतम क्रम या कहें, क्रूरता की सुनामी है और यह हम सब को झकझोर के रख सकती है। राजेश @ घोचरू ने महिला की गुदा पर एक सीमेंट की चादर रख दी और उसे ईंट से मारते हुए अंदर फेंक दिया। महिला ने आखिरी बार चीख कर अंतिम साँस ली। अब हम खुद से सवाल पूछते हैं कि इस मामले को दुर्लभतम से भी दुर्लभ मानने के लिए और क्या आवश्यक है!"

"सिर्फ मौत की सजा काफी नहीं- भारी जुर्माना भी लगाया"

अदालत ने आगे कहा कि इस मामले में सिर्फ मौत की सजा संतोषजनक नहीं है। भारी जुर्माना, जो अगर दोषियों की संपत्तियों की बिक्री से जब्त होता है, तो अतिरिक्त निवारक साबित होगा। अदालत ने पाया कि अगर दोषियों की संपत्ति बेचकर मुआवजा दिया जाता है तो पीड़ित या पीड़ित के संबंधित रिश्तेदार भी कम से कम अपनी पीड़ा के लिए कुछ हल खोज सकेंगे।

दोषियों पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए पीठ ने कहा:

"यह बहुत संभव है कि अपराधी में से एक या अधिक के पास कोई अचल संपत्ति न हो। हमारे द्वारा पाया गया कि सभी अरोपियों ने संयुक्त रूप से और व्यक्तिगत रूप से षडयंत्र के साथ भयावह अपराध किया है। यदि वे संयुक्त रूप से और व्यक्तिगत रूप से अपराध करने के लिए एक साथ आए थे और उनमें से किसी ने भी एक-दूसरे का विरोध नहीं किया था। हमें लगता है कि अजीबोगरीब तथ्यों और परिस्थितियों के तहत 50 लाख की राशि के भुगतान करने की देयता सभी पर संयुक्त और कठोर होनी चाहिए। इस प्रकार, अदालत इस निष्कर्ष पर आती है, कुल बिक्री आय में से, यदि कोई जब्ती होती है तो, बिक्री का आधा हिस्सा हरियाणा राज्य में जाना चाहिए और शेष आधा गवाह जानकी के पास।"

अदालत ने इसके बाद उपायुक्त को निर्देश दिया कि सभी दोषियों की अचल संपत्तियों की पहचान करें और उन्हें 1 महीने के भीतर संलग्न करें। उन्हें अनुलग्नक और रिपोर्ट अनुपालन की तारीख से 2 महीने के भीतर संलग्न संपत्तियों को बेचने के लिए निर्देशित किया गया।

जांच अधिकारी की हुई प्रशंसा

न्यायालय ने उपनिरीक्षक मोहम्मद इलियास की कड़ी मेहनत और व्यावसायिकता की भी सराहना की और कहा कि मामले के जांच अधिकारी ने एक कठिन केस की जांच की। पीठ ने कहा कि अब यह सरकार पर है कि उसे कैसे पुरस्कृत किया जाए।


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