क्या लोन पर मोहलत के बाद ब्याज पर भी ब्याज लगेगा ? सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय और RBI से पूछा 

  • क्या लोन पर मोहलत के बाद ब्याज पर भी ब्याज लगेगा ? सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय और RBI से पूछा 

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक से पूछा है कि क्या 6 महीने के लिए लोन पर मोहलत से भुगतान में ब्याज पर ब्याज लगेगा।

    न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की खंडपीठ ने कहा कि क्या भुगतान के ब्याज पर ब्याज लगेगा या नहीं। कोर्ट ने कहा कि उसकी पूछताछ ब्याज पर ब्याज के इस सीमित पहलू पर है।

    पीठ ने कहा,

    "हम संतुलन बना रहे हैं। केवल एक चीज जो हम चाहते हैं वह एक व्यापक उपाय है। इन कार्यवाहियों में हमारी चिंता केवल यह है कि क्या ब्याज जो स्थगित कर दिया गया है, उसे बाद में देय शुल्कों में जोड़ा जाएगा या क्या ब्याज पर ब्याज लगेगा।"

    सॉलिसिटर जनरल, तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि वित्त मंत्रालय सप्ताह के अंत में इस मुद्दे पर आरबीआई के साथ एक बैठक बुला रहा है। तदनुसार सुनवाई को 17 जून तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

    भारतीय स्टेट बैंक ने यह दलील देने के लिए हस्तक्षेप किया कि सभी बैंकों का विचार है कि ब्याज छह महीने की अवधि के लिए माफ नहीं किया जा सकता है।

    याचिकाकर्ता गजेंद्र शर्मा ने आरबीआई द्वारा 31 मई तक EMI के भुगतान पर तीन महीने की मोहलत देने के बाद ऋण पर ब्याज वसूलने को चुनौती दी है, जिसे अब 31 अगस्त, 2020 तक बढ़ा दिया गया है।

    याचिका में इसे असंवैधानिक करार दिया गया है, क्योंकि लॉकडाउन के दौरान, लोगों की आय पहले ही कम हो गई है और वे वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

    EMI चुकाने के लिए मोहलत के दौरान ब्याज के खिलाफ दाखिल याचिका पर  सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने जवाबी हलफनामे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि टर्म लोन चुकाने पर रोक के दौरान ब्याज पर छूट से बैंकों की वित्तीय स्थिरता और स्वास्थ्य को खतरा होगा।

    RBI ने इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें ब्याज की छूट नहीं हो सकती, क्योंकि इससे बैंकों के वित्तीय स्वास्थ्य और स्थिरता के साथ-साथ देनदारों के हितों को भी खतरा होगा।

    RBI ने कहा है कि इस कदम के पीछे का उद्देश्य COVID-19 महामारी और परिणामस्वरूप लॉकडाउन के कारण हुए व्यवधान के कारण लोन सेवा के बोझ को कम करना है। व्यवहार्य व्यवसाय की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ऐसा ही किया गया था।

    हलफनामे में कहा गया है,

    "इसलिए, नियामक पैकेज, इसके सार में, अधिस्थगन / स्थगन की प्रकृति में है और छूट प्राप्त करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।"

    सुप्रीम कोर्ट में RBI के जवाब में प्रकाश डाला गया है कि

    "RBI उन कठिनाइयों से निपटने में मदद कर रहा है, जो उधारकर्ताओं को संचित ब्याज को चुकाने में हो सकती हैं, साथ ही 23 मई को घोषणा की कि " लोन देने वाली संस्थाएं, अपने विवेक से, 31 अगस्त, 2020 तक की अवधि के लिए संचित ब्याज को एक वित्त पोषित ब्याज अवधि ऋण (FITL) में, परिवर्तित कर सकती है।"

    मोहलत प्रदान करने के संबंध में, RBI ने ने कहा है कि पात्र संस्थानों को उधारकर्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए अपने बोर्डों द्वारा अनुमोदित नीतियों को विकसित करने के लिए ऋण देने की आवश्यकता होती है। प्रत्येक संस्थान अपने ग्राहकों की आवश्यकताओं की पहचान करने के लिए सबसे उपयुक्त है।यही कारण है कि ऋणदाताओं के विवेक पर ये छोड़ा गया है।

    बैंकों द्वारा ब्याज वसूलने की अनुमति देने के महत्व के बारे में RBI का कहना है कि बैंकों से व्यवहार्य वाणिज्यिक विचार चलाने की उम्मीद की जाती है और वे वास्तव में जमाकर्ताओं के संरक्षक हैं। बैंकों के कार्यों को जमाकर्ताओं के हितों द्वारा निर्देशित होने की आवश्यकता है। बैंकों द्वारा लगाए गए ब्याज आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनते हैं।

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