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'सुप्रीम कोर्ट में वर्चुअल हियरिंग की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए' : एजी के के वेणुगोपाल रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखेंगे

LiveLaw News Network
6 Jan 2021 8:30 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट में वर्चुअल हियरिंग की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए :  एजी के के वेणुगोपाल  रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखेंगे
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अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट में वर्चुअल कोर्ट के जरिए की जा रही सुनवाई की पूरी व्यवस्था की समीक्षा करने की आवश्यकता है और वह इस संदर्भ में रजिस्ट्रार जनरल को एक पत्र लिखेंगे।

एजी न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश हो रहे थे और उन्हें केवल तब ही अनम्यूटिड किया गया था, जब संबंधित मामला डॉकेट पर आया था, जबकि उनकी तरफ से बार-बार नियंत्रण कक्ष को अनुरोध किया गया था कि पूर्ववर्ती मामले के दौरान उन्हें अनम्यूटिड कर दिया जाए।

उन्होंने कहा, ''यह बहुत परेशान करने वाला है। वे हमें रोक कर रखते हैं। उन्हें कम से कम हमें उस समय तो कनेक्शन देना चाहिए, जब पिछला मामला चल रहा हो, अन्यथा हमें कैसे पता चलेगा कि क्या हो रहा है।''

एजी ने कहा कि,''पूरे सिस्टम की समीक्षा करने की आवश्यकता है। मैं रजिस्ट्रार जनरल को एक पत्र लिखूंगा।''

न्यायमूर्ति राव ने सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि,''हम आपसे सहमत हैं। स्थिति खराब से अब बदतर होती जा रही है।''

एजी ने कहा कि,''कल, जस्टिस चंद्रचूड़ की अदालत में, स्थिति बहुत खराब थी। जबरदस्त गूंज थी। कोई भी कुछ सुन नहीं पा रहा था।''

वरिष्ठ अधिवक्ता सी.यू सिंह, जो इस मामले में उपस्थित थे, ने कहा कि,

''स्क्रीन काली पड़ती रहती है। हम आपके आधिपत्य को पल-पल देखते रहते हैं और स्क्रीन कभी चली जाती है और कभी वापिस आ जाती है। यह बहुत ही निराशाजनक है। मुझे लगा कि मेरे पास अत्याधुनिक तकनीक है, लेकिन यह इस Vidyo format के साथ काम नहीं कर रही है।''

न्यायमूर्ति राव सहमत होते हुए कहा कि,''हम आपको सुन सकते हैं, लेकिन आप धुंधला दिखाई दे रहे हैं। पिछले 3 दिनों से यह गंभीर समस्या आई है।''

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह बहुत बदतर है''ऐसे वर्चुअल कोर्ट में कार्यवाही को उचित तरीके से जारी रखना बहुत मुश्किल है'' और महासचिव को निर्देश दिया था कि वह शीर्ष अदालत में वर्चुअल हियरिंग के असंतोषजनक कामकाज के मुद्दे पर गौर करें।

जस्टिस संजय किशन कौल, दिनेश माहेश्वरी और हृषिकेश रॉय की खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए, वर्चुअल कोर्ट सिस्टम के असफल कनेक्शन के बारे में उल्लेख किया था।

आदेश में रिकाॅर्ड किया गया था कि,''हम शुरूआत में ही सुप्रीम कोर्ट में वुर्चअल कोर्ट सिस्टम के संतोषजनक ढंग से काम करने की अक्षमता के बारे में अपनी निराशा का उल्लेख करना चाहते हैं,जबकि पास में ही स्थित दिल्ली उच्च न्यायालय में ऐसी कोई समस्या नहीं है।''

दिल्ली हाईकोर्ट, जो सर्वोच्च न्यायालय के पास ही स्थित है, सिस्को वेबेक्स की सुविधाओं का उपयोग वर्चुअल कोर्ट प्रोसिडिंग के लिए कर रही है और सर्वोच्च न्यायालय कार्यवाही का संचालन करने के लिए Vidyo application का उपयोग करता है।

आदेश में कहा गया है कि जब कोई एक व्यक्ति भी बहस कर रहा होता है, तब भी आवाजों की गूंज होती है और यह समझना मुश्किल है कि वह क्यों हो रहा है।

''हम कल से डिस्कनेक्ट की समस्या का सामना कर रहे हैं, आवाजों की प्रतिध्वनि, तब भी होती है जब एक ही व्यक्ति बहस कर रहा होता है। यह समझ से बाहर है कि ऐसा क्यों हो रहा है जबकि इसके लिए ज्यादा लाइसेंस लिए गए हैं। केवल आवाज जिसे हम सुनते हैं वह हमारी खुद की आवाजों की प्रतिध्वनि होती है।''

उपरोक्त के प्रकाश में, यह व्यक्त करते हुए कि उपयुक्त तरीके से वर्चुअलय कोर्ट में कार्यवाही करना मुश्किल हो गया है, शीर्ष अदालत ने महासचिव को इस मुद्दे पर गौर करने का निर्देश दिया है।

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