Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

" हम अनुच्छेद 32 क्षेत्राधिकार में कटौती करने की कोशिश कर रहे हैं " : मुख्य न्यायधीश बोबडे

LiveLaw News Network
17 Nov 2020 3:10 PM GMT
 हम अनुच्छेद 32 क्षेत्राधिकार में कटौती करने की कोशिश कर रहे हैं  :  मुख्य न्यायधीश बोबडे
x

लगातार दूसरे दिन, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए अनिच्छा व्यक्त की।

सीजेआई एस ए बोबडे ने मंगलवार को कहा,

"हम अनुच्छेद 32 क्षेत्राधिकार में कटौती करने की कोशिश कर रहे हैं।"

सीजेआई ने उक्त टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा को दी, जो एक चुनावी मामले में अनुच्छेद 32 के तहत एक रिट याचिका में पेश हुई थीं और उच्च न्यायालय के सुनवाई के लिए जल्द तारीख नहीं देने की शिकायत कर रही थीं।

यह देखते हुए कि हाल ही में अनुच्छेद 32 के तहत याचिकाओं में बढ़ोतरी हुई है, सीजेआई ने कहा:

"हम इसकी सराहना नहीं करते हैं।"

चुनाव याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के लिए याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष एक प्रतिनिधित्व करने के लिए स्वतंत्रता देते हुए याचिका का निस्तारण किया गया था।

कल भी सीजेआई ने केरल यूनियन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) द्वारा दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान ऐसी ही टिप्पणी की थी, जिसमें मलयालम पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को हिरासत से मुक्त करने की मांग की गई है।

"हम अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिकाओं को हतोत्साहित करने की कोशिश कर रहे हैं, " सीजेआई ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को बताया था, जो KUWJ के लिए उपस्थित थे।

सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने कल समित ठक्कर द्वारा दायर अनुच्छेद 32 याचिका पर विचार करने से भी इनकार कर दिया था।

"उच्च न्यायालय भी आपके मौलिक अधिकारों को बरकरार रख सकता है। उच्च न्यायालय भी आपकी रक्षा कर सकता है," सीजेआई ने वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी से कहा, जो ठक्कर की ओर से पेश हुए थे।

जेठमलानी ने एफआईआर में अपराधों को इंगित करने का प्रयास किया कि ठक्कर के खिलाफ कुछ भी खुलासा नहीं हुआ और बाद में गिरफ्तारी के बाद एफआईआर दर्ज की गई।

Next Story