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पश्च‌िम बंगालः मोटापा घटाने की दवा से जले ग्राहक को वीएलसीसी देगी मुआवजा, कंज्यूमर फोरम ने दिया आदेश

LiveLaw News Network
19 Jan 2020 3:30 AM GMT
पश्च‌िम बंगालः मोटापा घटाने की दवा से जले ग्राहक को वीएलसीसी देगी मुआवजा, कंज्यूमर फोरम ने दिया आदेश
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कोलकाता के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ब्यूटी क्लिनिक वीएलसीसी को एक ग्राहक को क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया है। उस ग्राहक ने वीएलसीसी से मोटापा कम करने के लिए उपचार लिया था, जिससे उसे दूसरे दर्जे की बर्न इंजरी हो गई।

आयोग का ये आदेश मौजूदा दौर में महत्वपूर्ण है। इन दिनों एक और जहां सौंदर्य प्रसाधनों के उद्योग का धंध फलफूल रहा है, वहीं दूसरी ओर इनमें शामिल कंपनियां ग्राहकों से चालाकी भरे सहमति पत्रों पर दस्तखत करवाकर अपनी देनदारियों से बच जा रही हैं।

आयोग ने अपने फैसले में कहा है, "एक मरीज जो चिकित्सा में लापरवाही के कारण चोटिल हो गया है, उसे जिस प्रकार नुकसान हुआ है, उसे कानून और जनता बड़े पैमाने पर मुआवजे के योग्य मानती है।

आयोग ने वीएलसीसी को फैट रिडक्शन प्रोसेस के लिए शिकायतकर्ता द्वारा दिए पैसे वापस करने के लिए कहा है, साथ ही एक लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश भी दिया। आयोग न कहा है कि वीएलसीसी ये साबित नहीं कर पाया कि जब मोटापा कम करने की की प्रक्रिया शुरू की गई, तब ‌‌कोई विशेषज्ञ/ डॉक्टर भी उपस्थित था। इसलिए ये सेवा में कमी का मामला है।

मामले में इंडियन मेडिकल एसो‌श‌िएशन बनाम वीपी शांता व अन्य (1995) 6 SCC 651 के फैसले पर भरोसा किया गया, जिसके तहत कोर्ट ने कहा था कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 2 (1) (0) के तहत परिभाषित 'सेवा' के दायरे में मेडिकल प्रेक्टिशनर द्वारा मरीज को दी गई दोनों तरह की सेवाएं- चिकित्सकीय और शल्य (परामर्श, निदान और उपचार) आती हैं।

हालांक‌ि मामले में वीएलसीसी ने लापरवाही और सेवा में कमी के आरोपों से इनकार किया और कहा कि कि कॉस्मेटिक उपचार के नतीजे अलग-अलग व्यक्तियों के ऊपर अलग-अलग हो सकते हैं और उपचारोपरांत किसी प्रतिकूल प्रभाव का मतलब यह नहीं है कि लापरवाही से या गलत उपचार किया गया था।

वीएलसीसी की ओर से दावा किया गया कि शिकायतकर्ता को उपचार की पूरी प्रक्रिया, उपचार बाद के प्रभावों और संभावित जटिलताओं से बखूगी अवगत कराया गया था और उसी को स्वीकार करते हुए उसने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।

आयोग ने कहा कि क्लिनिक ने शिकायतकर्ता को लगातार आश्वासन दिया था कि किसी भी जटिलता से बचने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सख्त निगरानी में उपचार किया जाएगा। हालांकि, कंपनी ऐसा साबित करने में असफल रही।

आयोग ने कहा-

"कंपनी की ओर से सेवा में लापरवाही और कमी की गई है, इसलिए शिकायतकर्ता 2,00,069 रुपये के रिफंड का हकदार है।"

मामले का विवरण:

केस: अन्ना लुईस कोर्रिया बनाम वीएलसीसी हेल्थ केयर लिमिटेड व अन्य।

केस नं : CC N 396/2018

कोरम: स्वपन कुमार महंती (अध्यक्ष), सहाना अहमद बसु और अशोक कुमार गांगुली (सदस्य)

वकील: एडवोकेट मौसमी शोम (शिकायतकर्ता के लिए); एडवोकेट देवता मित्रा (प्रतिवादी के लिए)

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