TMC के फ्रीज बैंक अकाउंट के इस्तेमाल पर हाईकोर्ट की पाबंदियों में दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- व्यवस्था संतुलित

Amir Ahmad

11 Aug 2026 6:04 PM IST

  • TMC के फ्रीज बैंक अकाउंट के इस्तेमाल पर हाईकोर्ट की पाबंदियों में दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- व्यवस्था संतुलित

    सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए गए तृणमूल कांग्रेस के बैंक अकाउंट के संचालन को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से लगाई गई पाबंदियों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

    अदालत ने हाईकोर्ट की अंतरिम व्यवस्था को “संतुलित” बताते हुए दोनों याचिकाओं का निपटारा किया।

    जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 20 जुलाई के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।

    हाईकोर्ट ने तीन HDFC बैंक अकाउंट को सामान्य रूप से संचालित करने की अनुमति देने से इनकार किया था। इससे पहले 9 जुलाई को हाईकोर्ट ने इन अकाउंट से पार्टी के रोजमर्रा के खर्च चलाने की अनुमति दी थी और इसकी निगरानी के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया था।

    बागी तृणमूल नेता बिस्वनाथ दास की ओर से दायर एक अलग याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। दास ने 9 जुलाई के आदेश को चुनौती देते हुए दावा किया था कि वह वास्तविक तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने दोनों मामलों का निपटारा करते हुए कहा कि पक्षकार अपनी सभी आपत्तियां हाईकोर्ट में लंबित मुख्य मामले और हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी के समक्ष रख सकते हैं।

    जस्टिस सुंदरेश ने कहा,

    “हम कुछ नहीं कहेंगे। हम दोनों मामलों का निपटारा कर रहे हैं और इसे हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी के विवेक पर छोड़ते हैं। आपको जो भी कहना है, मुख्य याचिका में कहिए।”

    पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे अलग-अलग गुटों के विवाद में नहीं जाना चाहती। अदालत ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल सीमित राहत पर विचार करना था, ताकि पार्टी के रोजमर्रा के काम पूरी तरह बाधित न हों।

    ED ने तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक अकाउंट को फ्रीज किया है, जिनमें करीब 440 करोड़ रुपये होने की बात सामने आई है। एजेंसी के अनुसार यह कार्रवाई धनशोधन की जांच का हिस्सा है।

    आरोप है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच केयरवेल एविएशन इंडिया और उससे जुड़ी एक अन्य संस्था को धन का हस्तांतरण किया गया। यह कथित लेनदेन एक विमान और हेलीकॉप्टर की खरीद से संबंधित बताया गया।

    सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि यदि कथित अपराध से प्राप्त धन करीब 60 करोड़ रुपये है तो 400 करोड़ रुपये से अधिक की पूरी राशि को क्यों फ्रीज किया गया।

    उन्होंने कहा कि पार्टी के पास करीब 164 करोड़ रुपये की ऐसी राशि भी है जिस पर ED का कोई दावा या रोक नहीं है। उन्होंने 36 अकाउंट से संबंधित अतिरिक्त हलफनामों का हवाला दिया, जिनमें पांच बैंक खाते और 31 सावधि जमा शामिल हैं।

    सिब्बल ने कहा कि अकाउंट के फ्रीज होने से पार्टी अपने सामान्य वित्तीय दायित्वों को पूरा नहीं कर पा रही है। पार्टी में करीब 250 कर्मचारी हैं और वर्तमान महीने के करीब 53.23 लाख रुपये के वेतन का भुगतान किया जाना है। इसके अलावा कार्यालय कर्मचारियों और सुरक्षा सेवाएं देने वाली एजेंसियों को भी भुगतान किया जाना है।

    उन्होंने कहा कि पार्टी के 17 कार्यालयों का मासिक खर्च करीब एक करोड़ रुपये है और चुनाव से संबंधित काम करने वाले विभिन्न सेवा प्रदाताओं के बिल भी लंबित हैं।

    सिब्बल ने हाईकोर्ट के 9 जुलाई के आदेश का भी उल्लेख किया, जिसके तहत हाईकोर्ट के एक पूर्व जस्टिस को विशेष अधिकारी नियुक्त किया गया और तीन खातों से 30 सितंबर तक रोजमर्रा के खर्चों के लिए धन इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई।

    ED की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पिछली चिंता केवल यह थी कि तृणमूल कांग्रेस अपने रोजमर्रा के खर्च चला पाएगी या नहीं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के 9 जुलाई के आदेश के तहत तीन खाते रोजमर्रा के कामकाज के लिए उपलब्ध हैं।

    राजू ने दावा किया कि इंडियन बैंक में रखे गए खातों पर ED की कोई रोक नहीं है और करीब 125 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दो खातों पर स्थानीय पुलिस की ओर से भी कोई रोक नहीं है।

    हालांकि कपिल सिब्बल ने इस दावे पर आपत्ति जताई और कहा कि इंडियन बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार खातों पर रोक है। इस पर एसवी राजू ने दोनों खातों पर कोई रोक नहीं होने संबंधी हलफनामा दाखिल करने की पेशकश की।

    सुनवाई के दौरान बिस्वनाथ दास की ओर से सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर ने तृणमूल कांग्रेस को खातों के संचालन की राहत देने का विरोध किया।

    उन्होंने कहा कि जिन खातों को तृणमूल कांग्रेस ने बिना रोक वाला बताया है, उनमें से दो खातों पर पार्टी का दावा अलग प्रकृति का है।

    तृणमूल कांग्रेस की ओर से सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने जवाब दिया कि इनमें से एक खाता समाचार पत्र से संबंधित है, जबकि दूसरा सदस्यता शुल्क और सदस्यों के कल्याण के लिए बनाया गया खात।

    उन्होंने कहा कि इन खातों की राशि से कर्मचारियों का वेतन या कार्यालय का किराया देने पर बाद में नए विवाद खड़े हो सकते हैं।

    उन्होंने कहा,

    “यदि हम इन पैसों से वेतन देते हैं तो श्री राजू यह कहेंगे कि हम समाचार पत्र के पैसे और सदस्य कल्याण खाते के पैसे का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह धनशोधन है। इससे प्रशासनिक समस्याएं पैदा होंगी।”

    बिस्वनाथ दास की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि मामला पार्टी के खातों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की पृष्ठभूमि में सामने आया है।

    उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर कौन-सा गुट वास्तविक तृणमूल कांग्रेस है, यह विवाद निर्वाचन आयोग के समक्ष लंबित है।

    उनकी ओर से यह दलील दी गई कि हाईकोर्ट की अंतरिम व्यवस्था के कारण पार्टी के बैंक खातों का नियंत्रण प्रभावी रूप से एक गुट को मिल गया है, जिससे दूसरे गुट के हित प्रभावित हो रहे हैं।

    परमेश्वर ने कहा,

    “हम कह रहे हैं कि हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं। यदि हम तृणमूल कांग्रेस हैं तो हाईकोर्ट की बनाई अंतरिम व्यवस्था के जरिए केवल एक गुट को पार्टी का बैंक खाता संचालित करने की अनुमति देने का सवाल ही नहीं उठता।”

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद 20 दिनों के भीतर एक खाते में करीब 360 करोड़ रुपये जमा हुए थे।

    उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से केवल एक खाते के संचालन की अनुमति देने और पार्टी को अपने सभी खातों तथा उनमें उपलब्ध धनराशि का विवरण देने का निर्देश देने का आग्रह किया।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम चरण में इन तथ्यात्मक और गुटीय विवादों में जाने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि संबंधित पक्ष अपनी आपत्तियां विशेष अधिकारी और हाईकोर्ट में लंबित मुख्य कार्यवाही के समक्ष रख सकते हैं।

    यह मामला 18 जून 2026 को बिस्वनाथ दास की ओर से बिधाननगर साइबर अपराध पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत से शुरू हुआ था।

    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अवैध गतिविधियों से प्राप्त धन, प्रभाव के कथित दुरुपयोग और बेईमान वित्तीय लेनदेन से जुटाई गई राशि को तृणमूल कांग्रेस के तीन एचडीएफसी बैंक खातों के जरिए भेजा गया।

    उसी दिन भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने 23 जून 2026 को धनशोधन का मामला दर्ज किया। जांच और तलाशी की कार्रवाई के बाद 7 जुलाई 2026 को एजेंसी ने छह बैंक अकाउंट को फ्रीज किया, जिनमें तृणमूल कांग्रेस के तीन एचडीएफसी बैंक खाते भी शामिल थे।

    पार्टी ने खातों को फ्रीज किए जाने की कार्रवाई को मनमाना और बिना पर्याप्त आधार के की गई कार्रवाई बताया था। उसका कहना था कि किसी स्पष्ट रूप से चिन्हित अपराध से प्राप्त धन के संबंध में पर्याप्त आधार बताए बिना पूरे खातों को फ्रीज कर दिया गया।

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने हालांकि अंतरिम चरण में कथित धन हस्तांतरण की वैधता पर विस्तृत विचार करने से इनकार किया था। अदालत ने कहा था कि संबंधित पक्षों को धनशोधन रोकथाम अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष और रिट याचिका में जवाबी हलफनामे दाखिल होने के बाद अपनी आपत्तियां रखने का अवसर मिलेगा।

    हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि उसे याचिकाकर्ताओं के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला और सुविधा का संतुलन नहीं मिला।

    सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट की इस अंतरिम व्यवस्था में कोई हस्तक्षेप नहीं किया और दोनों याचिकाओं का निपटारा करते हुए पक्षकारों को अपने सभी विवाद हाईकोर्ट और विशेष अधिकारी के समक्ष उठाने की स्वतंत्रता दी।

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