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एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड परीक्षा 2019 के टॉपर ने साझा किए अनुभव, भावी उम्मीदवारों को दिए टिप्स

LiveLaw News Network
25 March 2020 4:00 AM GMT
एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड परीक्षा 2019 के टॉपर ने साझा किए अनुभव, भावी उम्मीदवारों को दिए टिप्स

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (एओआर) परीक्षा परिणाम जून 2019 के परिणाम सोमवार को घोषित किए गए। इस वर्ष, ताहिरा करंजवाला और नमित सक्सेना क्रमशः रैंक 1 और 2 पर रहे।

भारत में कानून के शीर्ष न्यायालय में प्रैक्टिस करने के लिए गहन विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। कई रिपोर्टों के अनुसार, केवल 18% परीक्षार्थी एओआर परीक्षा पास करते हैं, जो यह बताता है कि इस परीक्षा को पास करना कोई आसान काम नहीं है।

एओआर परीक्षा को क्रैक करने के लिए क्या किया जाए? यह बताने के लिए इस परीक्षा के टॉपर्स से बेहतर कौन बता सकता है?

इस वर्ष, ताहिरा करंजवाला और नमित सक्सेना क्रमशः रैंक 1 और 2 पर रहे। यह प्रतिष्ठित परीक्षा साल बोर्ड ऑफ एग्जामिनर्स (सुप्रीम कोर्ट द्वारा विनियमित) द्वारा आयोजित की जाती है। एओआर परीक्षा को चार पेपरों में विभाजित किया गया है; ड्राफ्टिंग, प्रैक्टिस एंड प्रोसिजर, लीगल एथिक्स एंड लीडिंग केस। यह परीक्षा हर साल जून के महीने में आयोजित की जाती है।

ताहिरा करंजावाला, जो वर्तमान में करंजवाला एंड कंपनी में प्रिंसिपल एसोसिएट हैं, कोलंबिया लॉ स्कूल एंड एमिटी लॉ स्कूल दिल्ली की पूर्व छात्रा रही हैं। वे न्यूयॉर्क बार में भी नामांकित हैं और अपनी लॉ प्रैक्टिस को नजरअंदाज किए बिना इस परीक्षा की चुनौतियों का सामनाकिया है।

करंजवाला कहती हैं, "मुझे लगता है कि ज्यादातर लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा के लिए अपनी प्रैक्टिस के साथ-साथ पढ़ाई करना है।"

वह कहती हैं कि समय प्रबंधन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सभी परीक्षाओं में है। भले ही वह परीक्षा की तैयारी के लिए मई और जून में (जब अदालत में अवकाश होता है) ध्यान देने पर जोर देती हैं, लेकिन साथ ही वह मार्च या अप्रैल के बाद से परीक्षा की तैयारी में कुछ समय लगाने की कोशिश करने का सुझाव देती हैं।

करंजवाला ने परीक्षा की तैयारियों की कुछ सीख साझा की:

वरिष्ठ अधिवक्ताओं की कक्षाओं में भाग लें।

ड्राफ्टिंग पेपर के लिए: -

नीचे उन बिंदुओं के बारे में अपने दिमाग में एक व्यापक रूपरेखा तैयार करें, जिन्हें कवर करना है;

प्रश्नों के बीच समय का अनुमान लगाना महत्वपूर्ण है क्योंकि इनमें समय लगता है।

प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर पर पेपर के साथ-साथ लीगल एथिक्स व्यावहारिक ज्ञान का परीक्षण करता है। निम्नलिखित का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना महत्वपूर्ण है:

सुप्रीम कोर्ट के नियम, 2013

अधिवक्ता अधिनियम, 1961

बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स

लीडिंग केस पेपए के लिए, अपने नोट्स खुद बनाने की रणनीति सबसे अच्छी होती हि क्योंकि निर्धारित मामले लंबे होते हैं और फिर से पढ़ने में समय लगता है।

करंजवाला ने कहा, कुल मिलाकर, समय प्रबंधन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सभी परीक्षाओं में आवश्यक है।"

नमित सक्सेना एक प्रैक्टिसिंग एडवोकेट हैं, जिन्होंने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, लखनऊ से स्नातक किया है। तत्कालीन सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार के चेंबर में काम करने के बाद, उन्हें अकादमिक लेखन का भी शौक है। उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता (रतनलाल धीरजलाल) और नागरिक प्रक्रिया संहिता (मुल्ला) के हार्ड बॉन्ड और पेपरबैक संस्करणों सहित कानूनी क्लासिक्स को संशोधित किया है।

उन्होंने एमपी जैन के संवैधानिक कानून को संशोधित करने में जस्टिस जलेटी चेलमेश्वर और जस्टिस डी.एस. नायडू की भी सहायता की।

वह जोर देकर कहते हैं कि अन्य इच्छुक उम्मीदवारों पर लीड लेने के लिए नियमित रूप से स्वयं को अपडेट करना और उत्तर पुस्तिकाओं में महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करना बेहद महत्वपूर्ण है।

सक्सेना ने इस परीक्षा के भावी उम्मीदवारों के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स दिए।

प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर पेपर के लिए संविधान और सुप्रीम कोर्ट के नियम, 2013 से न्यायशास्त्रीय खंड पढ़ें।

ड्राफ्टिंग के पेपर के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

प्रारंभिक, प्रेयर और सत्यापन खंड (एस) के पैटर्न जानें;

ग्राउंड रेजर-शार्प और रिपिटिटिव नहीं होने चाहिए;

उचित स्थान छोड़ना, अच्छी लिखावट और समायोजन शीर्षकों जैसे छोटे लेकिन प्रासंगिक विवरणों पर ध्यान दें।

लीडिंग केस के पेपर के लिए, लीडिंग केस की पृष्ठभूमि को जानना अत्यावश्यक है।

सक्सेना कहते हैं, "उदाहरण के लिए, कर्नाटक के सेल्वी बनाम कर्नाटक राज्य में फैसले को ठीक से समझने के लिए, डॉक्टर नार्को और उनके प्रयोगों के बारे में जानना चाहिए। इससे आपको अन्य उम्मीदवारों पर अतिरिक्त बढ़त मिलती है।"

हाइलाइट करें कि विभिन्न बेंचों में चीजों को देखने के विभिन्न तरीके कैसे हैं। चूंकि परीक्षार्थी अदालत के वरिष्ठ अधिवक्ता होते हैं, वे उन न्यायाधीशों से बहुत अच्छी तरह से वाकिफ होते हैं और यह बहुत फायदेमंद हो सकता है।

एथिक्स पेपर के लिए, वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटरमणि द्वारा लिखे गए नोट्स और हाल ही में उनके द्वारा लिखित पुस्तक में सब कुछ शामिल है।

ताहिरा और नमित दोनों इस साल परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को शुभकामनाएं दीं।

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