टाटा Vs साइरस मिस्त्री : सुप्रीम कोर्ट ने RoC पर टिप्पणी करने वाले NCLAT के फैसले पर भी रोक लगाई 

टाटा Vs साइरस मिस्त्री : सुप्रीम कोर्ट ने RoC पर टिप्पणी करने वाले NCLAT के फैसले पर भी रोक लगाई 

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ( NCLAT) के 6 जनवरी के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें टाटा संस बनाम साइरस मिस्त्री फैसले में कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग करने वाली रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज द्वारा दाखिल याचिका को खारिज कर दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने टाटा संस की याचिका पर नोटिस भी जारी किया है।

दरअसल रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज द्वारा कंपनी अधिनियम की धारा 420 (2) और 424 (1) के तहत स्थानांतरित, NCLAT नियम, 2016 के नियम 11 के साथ दाखिल आवेदन में फैसले के पैराग्राफ 166-187 में संशोधन की मांग की गई थी।

NCLAT की टिप्पणी इस निष्कर्ष के संदर्भ में की गई थी कि टाटा संस का "निजी कंपनी" के रूप में रूपांतरण अवैध था।

रजिस्ट्रार के अनुसार उक्त पैराग्राफ में उन टिप्पणियों को रिकॉर्ड किया गया हजो अपने वैधानिक कर्तव्यों के पालन में RoC मुंबई की कार्रवाइयों के विरुद्ध हैं।

RoC के आवेदन में कहा गया था कि अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा पारित सख्त टिप्पणी "अनुचित और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, जिसके लिए आवश्यक है कि संबंधित पक्ष को उसके खिलाफ कोई भी आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर दिया जाए।"

RoC ने तर्क दिया था कि अनुच्छेद 181 में अवलोकन कहता है कि टाटा संस ने कंपनी की प्रकृति को बदलने के लिए जल्दबाज़ी की थी, जो RoC की मदद से प्रभावित हुई थी, रजिस्ट्रार पर आशंका पैदा करती है।

उसी का हवाला देते हुए, रजिस्ट्रार ने कहा था कि:

'हम कर्तव्य या वैधानिक कार्य करने के लिए बाध्य हैं। हमने कंपनी की मदद नहीं की। '

हालांकि अपीलीय ट्रिब्यूनल ने RoC के दावों का जवाब देते हुए कहा था कि फैसले के ऑपरेटिव हिस्से के लिए संशोधन की मांग की गई है और यदि आपको आदेश के ऑपरेटिव भाग में कोई समस्या है तो आप सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

पीठ ने आगे कहा था :

'टाटा संस आपकी मंजूरी के बिना कंपनी का स्वरूप नहीं बदल सकता था। आदेश में 'जल्दबाजी' शब्द कंपनी को संदर्भित करता है न कि RoC को। हमारा आदेश किसी भी उद्देश्य से नहीं पारित किया गया था और यह RoC पर कोई आशंका नहीं रखता है।

'ऐसा लगता है कि आप कंपनी के लिए बहस कर रहे हैं।'

इस दौरान RoC ने प्रस्तुत किया था कि वर्तमान कंपनी अधिनियम किसी कंपनी को निजी के रूप में निर्धारित करने के लिए कोई सदस्यता सीमा प्रदान नहीं करता है। उक्त संशोधन 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के उद्देश्य के अनुरूप लाया गया था।

अपीलीय न्यायाधिकरण ने उक्त दलीलों की रिकॉर्डिंग करते हुए कहा था कि कंपनी अधिनियम की धारा 66 के अनुसार, संसद ने नियमों को केंद्र सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी सौंपी है।

वहीं टाटा संस और रतन टाटा ने NCLAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी और सुप्रीम कोर्ट ने साइरस मिस्त्री को अध्यक्ष पद पर बहाल करने के फैसले पर रोक लगा दी थी।