बिरेन सिंह के ऑडियो क्लिप से छेड़छाड़ की गई: NFSU रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने कुकी संगठन को रिपोर्ट देखने की अनुमति दी

Amir Ahmad

7 Aug 2026 4:32 PM IST

  • बिरेन सिंह के ऑडियो क्लिप से छेड़छाड़ की गई: NFSU रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने कुकी संगठन को रिपोर्ट देखने की अनुमति दी

    सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह से कथित रूप से जुड़े ऑडियो क्लिप की जांच से संबंधित मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की नवीनतम फॉरेंसिक रिपोर्ट कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

    कुकी संगठन ने इन ऑडियो क्लिपों की जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इनमें मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से जुड़े मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री की कथित भूमिका सामने आती है।

    जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजय सचदेवा की खंडपीठ ने आदेश दिया कि NFSU की रिपोर्ट पक्षकारों को सीलबंद लिफाफे में उपलब्ध कराई जाए। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा और इसकी गोपनीयता बनाए रखी जाएगी।

    NFSU की दूसरी रिपोर्ट के अनुसार जांच किए गए ऑडियो क्लिप में बदलाव पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि रिकॉर्डिंग को प्रमाणित करना या बिरेन सिंह की स्वीकार्य वॉइस सैंपल से उसका मिलान करना संभव नहीं है।

    एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की। उन्होंने बताया कि NFSU ने निष्कर्ष निकाला है कि शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई रिकॉर्डिंग की पहली पीढ़ी की कॉपी में भी बदलाव किया गया, जिसके कारण विश्वसनीय फॉरेंसिक जांच संभव नहीं हो सकी।

    उन्होंने अदालत से याचिका खारिज करने का आग्रह करते हुए कहा कि बार-बार किए गए प्रयासों के बावजूद ऑडियो की प्रमाणिकता स्थापित नहीं हो सकी और क्लिप "स्पष्ट रूप से छेड़छाड़ की गई" प्रतीत होती है।

    याचिकाकर्ता कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने इस दलील का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में पूरी तरह दुर्भावना दिखाई गई। उन्होंने बताया कि ट्रुथ लैब्स की रिपोर्ट में 93 प्रतिशत से अधिक संभावना के साथ कहा गया था कि रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाज बिरेन सिंह की है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NFSU रिपोर्ट की गोपनीयता इस हद तक बनाए रखी जाए कि इसे सार्वजनिक मंच पर जारी न किया जाए।

    अदालत ने कहा,

    "रिपोर्ट की गोपनीयता बनाए रखी जाए और इसे सार्वजनिक या सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा न बनाया जाए।"

    प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि वे NFSU रिपोर्ट को ट्रुथ लैब्स के विशेषज्ञों के सामने उनकी राय के लिए रखना चाहते हैं।

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ऑडियो की प्रमाणिकता जांचने के लिए शिकायतकर्ता से मूल रिकॉर्डिंग NFSU को सौंपने को कहा था। इससे पहले कई प्रयासों में ऑडियो में बदलाव पाए जाने के कारण आवाज की पुष्टि नहीं हो सकी थी।

    पिछले साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब, गुवाहाटी की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश दिया था। मई में अदालत ने उस रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए नई फॉरेंसिक रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद अगस्त में NFSU को जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया।

    जनवरी में अदालत ने NFSU को पूरे 48 मिनट के ऑडियो क्लिप की जांच करने और उसे बिरेन सिंह की प्रमाणित आवाज से मिलाने का निर्देश दिया था। हालांकि, बाद में सामने आया कि ऑडियो में बदलाव होने के कारण आवाज़ की तुलना करना संभव नहीं हो पा रहा है।

    इसके बाद अदालत ने शिकायतकर्ता से मूल और बिना बदलाव वाली रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की संभावना तलाशने को कहा था। वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि इससे शिकायतकर्ता की पहचान उजागर होने का खतरा हो सकता है, लेकिन वे प्रयास करेंगे।

    बाद में अदालत को बताया गया कि शिकायतकर्ता ने दो घंटे 26 मिनट से अधिक लंबी ऑडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध करा दी है। अदालत ने राज्य सरकार को बिरेन सिंह की प्रमाणित वॉइस सैंपल उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया था, ताकि दोनों की तुलना की जा सके।

    30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने ऑडियो की पहली पीढ़ी की कॉपी को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने का आदेश दिया था।

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