NEET-UG पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला— अब ऐसे नहीं चल सकता, NTA सुधारों की सालभर करेगा निगरानी

Amir Ahmad

24 July 2026 4:04 PM IST

  • NEET-UG पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला— अब ऐसे नहीं चल सकता, NTA सुधारों की सालभर करेगा निगरानी

    NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक के कारण रद्द होने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

    जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही गड़बड़ियों और तदर्थ व्यवस्था के भरोसे अब काम नहीं चल सकता।

    अदालत ने कहा कि वह NTA में किए जा रहे संस्थागत सुधारों की पूरे वर्ष निगरानी करेगी ताकि परीक्षा व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत बनाया जा सके।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर है और एनटीए में व्यापक सुधारों पर काम चल रहा है।

    उन्होंने कहा कि सरकार पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों से भी आगे जाकर सुधार लागू करने पर विचार कर रही है।

    पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त तक स्थगित करते हुए केंद्र सरकार से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल हालिया संकट का समाधान नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं दोबारा न हों।

    सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि राधाकृष्णन समिति की उन सिफारिशों पर अब तक क्या प्रगति हुई, जिनमें एनटीए के लिए एक प्रभावी संचालन बोर्ड, पारदर्शी नियुक्तियां और विभिन्न पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही गई।

    अदालत ने यह भी जानना चाहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और केंद्रीय विद्यालय संगठन जैसे संस्थानों से विशेषज्ञों की नियुक्ति की दिशा में क्या कदम उठाए गए।

    जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा ने कहा,

    "हमारा सबसे बड़ा जोर संस्थागत व्यवस्था पर है। वर्षों से एड हॉक व्यवस्था ने सबसे ज्यादा परेशान किया है। अब इससे बाहर निकलना होगा।"

    पीठ ने यह भी पूछा कि NTA में डिजिटल अवसंरचना, परीक्षा संचालन, अनुसंधान एवं विकास, पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सुरक्षा, निगरानी और सतर्कता जैसे अलग-अलग प्रकोष्ठ बनाने की दिशा में कितना काम हुआ है।

    अदालत ने सरकार को इन सभी प्रस्तावित इकाइयों की प्रगति का पूरा ब्यौरा देने का निर्देश दिया।

    सुनवाई के दौरान परीक्षा सुरक्षा पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

    अदालत ने पूछा कि परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और उसके बाद सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या स्थायी उपाय किए गए। साथ ही राज्य और जिला स्तर पर परीक्षा प्रबंधन तंत्र, एक से अधिक चरणों में परीक्षा आयोजित करने की संभावना और संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) जैसी प्रणाली अपनाने पर भी सरकार से जवाब मांगा गया।

    जब सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि इस वर्ष प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन के लिए भारतीय वायुसेना की मदद ली गई, तब जस्टिस नरसिम्हा ने कहा,

    "यह केवल इस वर्ष की एड हॉक व्यवस्था हो सकती है। इसका स्थायी समाधान होना चाहिए।"

    अदालत ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली की ओर प्रस्तावित बदलाव पर भी विस्तृत जानकारी मांगी।

    पीठ ने कहा कि यदि भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराई जाती है तो डेटा सुरक्षा, प्रश्नपत्रों के एन्क्रिप्शन, सुरक्षित डेटा हस्तांतरण और अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं पर भी स्पष्ट योजना प्रस्तुत की जाए।

    अदालत ने डिजी यात्रा जैसी तकनीक का उपयोग कर अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने की संभावना पर भी विचार करने को कहा।

    सुनवाई के अंत में जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा ने कहा,

    "हम इस पूरे सुधार अभियान की निगरानी करेंगे। हम अतिरिक्त प्रयास करेंगे ताकि मजबूत व्यवस्था स्थापित हो सके। अब यह सब ऐसे नहीं चल सकता।"

    अदालत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता तन्वी दुबे को भी निर्देश दिया कि परीक्षा सुधारों से जुड़े सभी सुझाव विशेषज्ञ समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं।

    यह मामला NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद दायर कई याचिकाओं से जुड़ा है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) और फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फैमा) सहित विभिन्न संगठनों ने NTAके पुनर्गठन या उसे समाप्त कर संसद के कानून के तहत नई वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा संस्था गठित करने की मांग की।

    याचिकाओं में कहा गया कि बार-बार पेपर लीक होने से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है तथा परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर हुआ है।

    याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू होने के बावजूद संगठित नकल और पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुक सकीं, जिससे छात्रों और उनके परिवारों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट अब इन सुधारों की प्रगति पर नियमित निगरानी करेगा ताकि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

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