शुगर, नमक या वसा में से किसी एक की मात्रा अधिक होने पर भी पैकेट पर चेतावनी लेबल लगाने पर विचार करेगा FSSAI, सुप्रीम कोर्ट में बदला रुख

Amir Ahmad

10 Sept 2026 5:44 PM IST

  • शुगर, नमक या वसा में से किसी एक की मात्रा अधिक होने पर भी पैकेट पर चेतावनी लेबल लगाने पर विचार करेगा FSSAI, सुप्रीम कोर्ट में बदला रुख

    पैकेट में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में अगर शुगर, नमक या वसा में से किसी एक पोषक तत्व की मात्रा भी तय सीमा से अधिक है तो उस पर सामने की ओर चेतावनी लेबल लगाने पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण विचार करेगा।

    FSSAI ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अपने पहले के प्रस्ताव से अलग रुख अपनाते हुए यह बात कही। पहले प्रस्ताव में दो या उससे अधिक पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होने पर ही चेतावनी लेबल लगाने की बात कही गई।

    जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर लाल रंग के षट्कोणीय चेतावनी लेबल लगाने के प्रस्ताव से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत की ओर से यह सवाल उठाए जाने के बाद FSSAI ने अपना रुख बदला कि यदि किसी खाद्य पदार्थ में केवल एक पोषक तत्व की मात्रा अधिक है तो उसे चेतावनी से बाहर रखने का आधार क्या है।

    FSSAI की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बृजेंद्र चाहर ने शुरुआत में बताया कि चेतावनी लेबल को दो चरणों में लागू करना व्यावहारिक हो सकता है। पहले चरण में उन खाद्य पदार्थों को शामिल करने का सुझाव था जिनमें दो पोषक तत्वों की मात्रा अधिक हो और दूसरे चरण में ऐसे उत्पादों को शामिल किया जाए, जिनमें केवल एक पोषक तत्व की मात्रा अधिक हो। हालांकि, बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि दो चरणों में लागू करने का विचार केवल सुझाव था और अंतिम निर्णय अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा। FSSAI ने अदालत के इस सुझाव पर सहमति जताई कि चेतावनी लेबल एक ही चरण में ऐसे सभी उत्पादों पर लागू किया जा सकता है जिनमें चिंता वाले पोषक तत्वों में से किसी एक की मात्रा अधिक हो।

    मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने FSSAI से यह स्पष्ट करने को कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में दो चरणों की जरूरत क्यों है और क्या केवल एक पोषक तत्व की मात्रा अधिक होने पर भी उत्पाद पर चेतावनी लगाई जाएगी।

    खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े संगठन की ओर से सीनियर एडवोकेट मनींदर सिंह ने चेतावनी लेबल तय करने के मानकों को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में खाद्य पदार्थ की प्रति 100 ग्राम मात्रा के आधार पर भी जांच की जा रही है और प्रति सर्विंग मात्रा के आधार पर भी।

    उन्होंने बताया कि संगठन ने FSSAI को दिए अपने प्रतिवेदन में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया है जिनमें उनके अनुसार 100 ग्राम के आधार पर आकलन किया जाता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई जगह सर्विंग की मात्रा को भी ध्यान में रखा जाता है।

    सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और पौष्टिक खाद्य पदार्थों के बीच अंतर किए जाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों को एक ही श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कुरकुरे और नमकीन काजू का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों में अंतर किया जाना चाहिए और कुरकुरे जैसे उत्पादों पर अधिक स्पष्ट चेतावनी होनी चाहिए।

    कामत ने यह सुझाव भी दिया कि चेतावनी के लिए लाल रंग के बजाय किसी दूसरे रंग पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में लाल रंग को आमतौर पर मांसाहारी खाद्य पदार्थों से जोड़ा जाता है।

    याचिकाकर्ता संस्था की ओर से एडवोकेट राजीव शंकर द्विवेदी ने भी FSSAI के प्रस्ताव में बताए गए विभिन्न पहलुओं पर अदालत का ध्यान आकर्षित किया और याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल जवाब में उठाए गए मुद्दों का उल्लेख किया।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि अदालत मामले को आगे बढ़ाने से पहले पक्षकारों से और जानकारी चाहती है। पीठ ने संकेत दिया कि FSSAI और याचिकाकर्ता को अदालत के आदेश के आधार पर अपनी प्रतिक्रिया और आवश्यक रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

    अदालत ने कहा कि वह मामले पर आदेश पारित करेगी और पक्षकारों से कहा कि आदेश का अध्ययन करने के बाद आवश्यक रिपोर्ट के साथ वापस आएं। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होने की संभावना है।

    जस्टिस पारदीवाला ने मामले की गंभीरता बताते हुए कहा कि अदालत की चिंता लोगों के स्वास्थ्य को लेकर है, खासकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर। उन्होंने कहा कि अदालत ने इस विषय को बेहद गंभीरता से लिया है और राष्ट्रीय हित से जुड़े इस मुद्दे पर सभी पक्षों से सहयोग की अपेक्षा है।

    मामला '3एस एंड अवर हेल्थ सोसाइटी बनाम भारत संघ एवं अन्य' से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में यह कार्यवाही पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में शुगर, नमक और वसा की अधिक मात्रा को लेकर चेतावनी व्यवस्था लागू करने की मांग से संबंधित है।

    FSSAI के बदले हुए रुख के बाद अब अदालत के आदेश और आगे तय होने वाले मानकों पर नजर रहेगी।

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