FCRA संशोधन विधेयक 2026 को लोकसभा ने संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा, अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के आरोप पर सरकार ने किया पलटवार

Amir Ahmad

12 Aug 2026 3:45 PM IST

  • FCRA संशोधन विधेयक 2026 को लोकसभा ने संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा, अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के आरोप पर सरकार ने किया पलटवार

    लोकसभा ने बुधवार को विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया। विधेयक को लेकर कुछ अल्पसंख्यक संगठनों की ओर से आपत्तियां जताई गई हैं।

    लोकसभा की कार्यसूची में विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए जाने का उल्लेख था लेकिन सदन में यह प्रस्ताव गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया।

    संक्षिप्त चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने अमित शाह की अनुपस्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला है और इसे वापस लेने की मांग की।

    समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि विपक्ष के सभी सदस्य मिलकर इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं क्योंकि यह अल्पसंख्यक विरोधी है।

    केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाता हो। उन्होंने कहा कि भारत कोई केले का गणराज्य है और विदेशी धन केवल कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विधेयक का उद्देश्य सभी समुदायों की सुरक्षा करना है।

    विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने के प्रस्ताव के अनुसार समिति में लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा नामित 21 सदस्य और राज्यसभा के सभापति द्वारा नामित 10 सदस्य होंगे। समिति को अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में पेश करनी होगी।

    लोकसभा ने इससे पहले अप्रैल में इस विधेयक पर चर्चा टाल दी थी। विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। उस समय केरल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव नजदीक थे और विभिन्न चर्च संगठनों ने प्रस्तावित संशोधनों को लेकर चिंता जताई थी।

    क्या हैं विधेयक के प्रमुख प्रस्तावित बदलाव?

    विधेयक में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में एक नया अध्याय जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके तहत नामित प्राधिकरण की व्यवस्था की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति या संस्था का विदेशी अंशदान प्राप्त करने का प्रमाणपत्र रद्द, समर्पित या समाप्त हो जाता है तो उसका विदेशी अंशदान अस्थायी रूप से नामित प्राधिकरण के पास चला जाएगा। इस प्राधिकरण की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी।

    यदि संबंधित व्यक्ति या संस्था निर्धारित अवधि में नया प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं करती या पुराने प्रमाणपत्र का नवीनीकरण अथवा बहाली नहीं कराती तो विदेशी अंशदान और उससे खरीदी गई संपत्तियां स्थायी रूप से नामित प्राधिकरण के पास चली जाएंगी।

    ऐसी स्थायी रूप से निहित संपत्तियों को केंद्र या राज्य सरकार के संबंधित मंत्रालय, विभाग या प्राधिकरण को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हस्तांतरित किया जा सकेगा।

    यदि ऐसी संपत्ति कोई पूजा स्थल है, तो उसे इस तरह नियंत्रित किया जाएगा कि उसका धार्मिक स्वरूप बरकरार रहे।

    विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि जिन व्यक्तियों या संस्थाओं का विदेशी अंशदान या संपत्ति नामित प्राधिकरण के पास चली गई है, उन्हें अपनी लेखा पुस्तकों, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों, बैंक खातों और अन्य संबंधित रिकॉर्ड तक बिना बाधा पहुंच उपलब्ध करानी होगी।

    नामित प्राधिकरण को कुछ मामलों में दीवानी अदालत जैसी शक्तियां देने का भी प्रस्ताव है। इनमें किसी व्यक्ति को समन करना, उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना, दस्तावेज पेश कराने और साक्ष्य प्राप्त करने जैसी शक्तियां शामिल हैं।

    नामित प्राधिकरण के आदेश से असंतुष्ट व्यक्ति 90 दिनों के भीतर जिला जज के समक्ष अपील कर सकेगा।

    विधेयक में विदेशी अंशदान स्वीकार करने से प्रतिबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की श्रेणी में भी बदलाव प्रस्तावित है। मौजूदा प्रावधान में मीडिया या समाचार कंपनी अथवा संगठन जैसी कुछ श्रेणियां शामिल हैं। संशोधन के जरिए इसके दायरे को बढ़ाकर कोई भी व्यक्ति किए जाने का प्रस्ताव है।

    इसके अलावा, धारा 48 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसके तहत अधिनियम के तहत किसी अपराध की जांच शुरू करने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।

    अब संयुक्त संसदीय समिति विधेयक के प्रस्तावित प्रावधानों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में पेश करेगी।

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