BREAKING| संसद मार्च की अनुमति नहीं थी, प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल-प्रयोग नहीं किया: दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
Amir Ahmad
18 Aug 2026 11:38 AM IST

दिल्ली पुलिस ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित ज्यादती के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट में खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया गया।
पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन तब शांतिपूर्ण नहीं रहा, जब भीड़ ने बैरिकेड की कई परतें तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की और हिंसा शुरू हो गई। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से बल का इस्तेमाल किया गया।
उप पुलिस आयुक्त सचिन शर्मा की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा गया कि करीब 30 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगभग 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात थे। भीड़ करीब तीन किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई थी। पुलिस के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हुई। इसमें 240 से अधिक पुलिसकर्मी और वर्दीधारी अधिकारी तथा करीब 200 आम लोग और प्रदर्शनकारी घायल हुए।
पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की बड़ी संख्या और अलग-अलग स्थानों पर फैली भीड़ को देखते हुए जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग का आरोप टिकता नहीं है। हलफनामे में यह भी कहा गया कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी शामिल हो गए।
दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च को गैरकानूनी बताया। उसके अनुसार संसद मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई। इसलिए संसद की ओर बढ़ने का प्रयास गैरकानूनी सभा द्वारा किया गया गैरकानूनी कृत्य था।
पुलिस ने याचिकाओं में इस्तेमाल की गई तस्वीरों और वीडियो पर भी सवाल उठाया। हलफनामे में कहा गया कि याचिकाओं में चुनिंदा तस्वीरों, अधूरे वीडियो और अपुष्ट समाचार तथा सामाजिक माध्यमों की सामग्री पर भरोसा किया गया। पुलिस के अनुसार इससे घटना का एकतरफा चित्र सामने आता है और पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई का पूरा संदर्भ नहीं दिखता।
प्रदर्शन के दौरान कीलों वाली लाठियों के इस्तेमाल के आरोप पर पुलिस ने कहा कि उपलब्ध वीडियो में ऐसी एक वस्तु दिखाई देती है लेकिन वह पुलिस के हाथ में नहीं बल्कि प्रदर्शनकारी के हाथ में थी। पुलिस के अनुसार वह लाठी नहीं बल्कि राष्ट्रीय ध्वज लगा हुआ डंडा था।
पुलिस ने कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठियों का इस्तेमाल अनुमत साधनों में शामिल है। हलफनामे के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के कुछ समूहों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया जिसके बाद अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि हिंसा को नियंत्रित करने के लिए सभी कदम निर्धारित और अनुमत तरीकों के अनुरूप उठाए गए।
सादे कपड़ों में लाठी लिए पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पर भी दिल्ली पुलिस ने सफाई दी। पुलिस ने कहा कि विशेष शाखा, विशेष प्रकोष्ठ, अपराध शाखा और स्थानीय पुलिस के कुछ अधिकारी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भीड़ के बीच तैनात किए गए। पुलिस के अनुसार ऐसे अधिकारियों को भीड़ में तैनात करना न तो गैरकानूनी है और न ही असामान्य। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भी ऐसी व्यवस्था की जाती है।
हलफनामे में पुलिस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड की कई परतें तोड़ने के बाद हिंसा शुरू की। पुलिस के मुताबिक, कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारियों के बड़े समूह अकेले पुलिसकर्मियों को घेरते हुए दिखाई देते हैं। पुलिस का आरोप है कि अधिकारियों का सुरक्षा कवच खींचा गया उन्हें घसीटा गया और पत्थर लगे रास्तों पर धक्का दिया गया।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि करीब 2,873 लोगों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, दुष्कर्म और पॉक्सो कानून से जुड़े मामले भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इन लोगों की भूमिका की जांच दिल्ली पुलिस आयुक्त द्वारा गठित विशेष जांच दल करेगा।
पुलिस ने कहा कि बल प्रयोग के आरोपों की जांच अदालत द्वारा प्रस्तावित समिति के माध्यम से की जा सकती है और दिल्ली पुलिस इसमें पूरा सहयोग करेगी।
प्रदर्शन स्थल पर चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक के इस्तेमाल पर पुलिस ने इसे स्थिति के अनुरूप और संतुलित पुलिसिंग उपाय बताया। हलफनामे में कहा गया कि यह तकनीक प्रदर्शन स्थल पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की पहचान अपने आप दर्ज नहीं करती और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की अंधाधुंध निगरानी या उनकी निजी जानकारी जुटाने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता।
पुलिस ने कहा कि केवल चेहरे की पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। पहचान की पुष्टि के लिए मौके पर अलग से जांच की जाती है कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद था या नहीं। पुलिस के अनुसार इस तकनीक का इस्तेमाल गंभीर अपराधों में पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले लोगों की पहचान के लिए किया जाता है और मामूली मामलों, जैसे यातायात चालान, को इसके दायरे में नहीं रखा जाता।
यह जवाब उन याचिकाओं के संबंध में दाखिल किया गया, जिनमें प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग की गई। दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे को इससे जुड़े चार मामलों में साझा जवाब के तौर पर भी पेश किया।


