सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बिहार पुलिस फायरिंग मामला: राज्यसभा सांसद मनोज झा ने दोषी अधिकारियों पर FIR और SIT जांच की मांग की

Amir Ahmad

27 July 2026 12:09 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बिहार पुलिस फायरिंग मामला: राज्यसभा सांसद मनोज झा ने दोषी अधिकारियों पर FIR और SIT जांच की मांग की

    बिहार में NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और फायरिंग के मामले में राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में 20 जुलाई से देशभर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई कथित पुलिस ज्यादती की जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई।

    यह मामला सोमवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष उल्लेखित किया गया। सीनियर एडवोकेट फौजिया शकील ने अदालत को बताया कि याचिका में बिहार के सीवान में हुई पुलिस फायरिंग सहित सभी घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया।

    दरअसल, बिहार के सीवान जिले में 'बिहार बंद' के दौरान प्रदर्शन हिंसक हो जाने पर पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारी घायल हो गए। यह बंद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने नीट पेपर लीक के विरोध में बुलाया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को छात्रों पर कथित पुलिस बल प्रयोग से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया।

    याचिका में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश देने की मांग की गई कि 20 से 25 जुलाई के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस अत्याचार के मामलों में FIR दर्ज की जाए। विशेष रूप से 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई।

    मनोज झा ने प्रत्येक राज्य में पुलिस महानिदेशक और दो सीनियर महिला IPS अधिकारियों की विशेष जांच टीम गठित करने की मांग की। साथ ही यह भी अनुरोध किया कि जांच किसी रिटायर हाईकोर्ट जस्टिस की निगरानी में हो और पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुप्रीम कोर्ट करे। याचिका में तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने का अनुरोध किया गया।

    याचिका में सोशल मीडिया पर उपलब्ध पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो सुरक्षित रखने, पुलिसकर्मियों की पहचान सार्वजनिक करने तथा धारा 163 के तहत जारी आदेश, 'संसद चलो' मार्च की अनुमति से इनकार संबंधी दस्तावेज, CCTV, ड्रोन और बॉडी कैमरा फुटेज, बैरिकेडिंग योजना, लाठीचार्ज और आंसू गैस के आदेश, घायल प्रदर्शनकारियों एवं पुलिसकर्मियों की सूची तथा मेडिकल डॉक्यूमेंट्स सुरक्षित रखने और उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।

    इसके अलावा दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई, पीड़ित छात्रों को मुआवजा और चिकित्सा खर्च देने का निर्देश देने की भी मांग की गई।

    याचिका में यह भी आग्रह किया गया कि 20 से 25 जुलाई के बीच छात्र आंदोलनों से संबंधित दर्ज सभी एफआईआर का विवरण सार्वजनिक किया जाए और राज्यों को छात्रों को डराने, धमकाने, निगरानी करने या अनावश्यक हिरासत में लेने से रोका जाए।

    साथ ही पूरे देश के लिए सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस बल प्रयोग को लेकर एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की मांग की गई। इसमें यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया कि निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केवल न्यूनतम आवश्यक बल का प्रयोग हो, भीड़ नियंत्रण की पूरी कार्रवाई की रिकॉर्डिंग अनिवार्य हो, पुलिसकर्मी नाम-पट्टिका सहित वर्दी पहनें, घायल व्यक्तियों का तत्काल चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाए तथा पुलिस ज्यादती की शिकायतों की जांच स्वतंत्र SIT द्वारा की जाए।

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