प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक की मांग फिलहाल अस्पष्ट: सुप्रीम कोर्ट, नियमों को चुनौती दिए बिना नहीं मिल सकती राहत
Amir Ahmad
30 July 2026 1:54 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पेलेट गन के कथित इस्तेमाल के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि नागरिकों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पेलेट गन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग तब तक स्पष्ट नहीं मानी जा सकती, जब तक उन पुलिस नियमों को चुनौती न दी जाए जो विशेष परिस्थितियों में ऐसे हथियारों के उपयोग की अनुमति देते हैं।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह मौखिक टिप्पणी की। हालांकि अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि घायल याचिकाकर्ताओं और अन्य प्रभावित लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
यह याचिका एक्स IPS अधिकारी यशोवर्धन आजाद सहित तीन लोगों ने दायर की। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि 20 जुलाई को परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए 'संसद चलो' प्रदर्शन के दौरान RAF ने धातु के पेलेट दागे, जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हुए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने कहा कि उनकी आपत्ति RAF के शस्त्रागार में पेलेट गन रखने पर नहीं, बल्कि प्रदर्शनकारियों पर धातु के पेलेट इस्तेमाल करने पर है। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ताओं के शरीर से धातु के पेलेट निकाले गए।
इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत किसी विशेष घटना में पेलेट के इस्तेमाल की वैधता की जांच करने के लिए तैयार है लेकिन यह भी देखना होगा कि क्या बल प्रयोग क्रमिक और परिस्थितियों के अनुरूप किया गया।
वृंदा ग्रोवर ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस का ऐसा कोई स्थायी आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, जो पेलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति देता हो। उन्होंने आग्रह किया कि केंद्र सरकार संबंधित दिशा-निर्देश अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे ताकि याचिका में आवश्यक संशोधन किया जा सके।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह इस मामले में आवश्यक सहयोग करेंगे।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की कि घटना से जुड़े गोला-बारूद के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जांच के लिए आवश्यक सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएंगे।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि कई बार शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक हो सकते हैं, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों को परिस्थितियों के अनुसार क्रमिक तरीके से बल प्रयोग करना पड़ सकता है।
याचिका में आरोप लगाया गया कि पेलेट गन से निकले धातु के छर्रे अनियंत्रित दिशा में फैलते हैं और आंखों सहित शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए नागरिकों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इनका इस्तेमाल अनुपातिकता, आवश्यकता और तर्कसंगतता की संवैधानिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि नागरिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए धातु वाले पेलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए और 20 जुलाई की घटना में घायल सभी लोगों को मुआवजा, समुचित इलाज और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए।


