पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, UP Police की कार्रवाई पर अंतरिम सुरक्षा
Amir Ahmad
25 Aug 2026 1:47 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज FIR के मामले में मंगलवार को उन्हें अंतरिम राहत देते हुए किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम सुरक्षा उनके खिलाफ भविष्य में दर्ज की जाने वाली किसी FIR पर भी लागू होगी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं।
पीठ ने अभिषेक उपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया कि उन्हें संबंधित FIR की प्रति उपलब्ध कराई जाए। गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को अगली सुनवाई तक FIR की कॉपी दिए जाने के संबंध में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया।
मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट प्रदीप राय ने अभिषेक उपाध्याय की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चंदे में कथित गड़बड़ी का मामला सामने लाया था और अन्य मामलों पर भी खोजी रिपोर्टिंग की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ दर्ज FIR झूठे और मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है तथा उन्हें स्वतंत्र पत्रकारिता के कारण परेशान किया जा रहा है।
प्रदीप राय ने यह भी कहा कि घटना के समय की CCTV फुटेज से आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकती है और इन रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाना चाहिए। उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग भी की।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,
"बार-बार FIR दर्ज होने से आपकी आशंका को हम समझते हैं। हमें सच्चाई का पता नहीं है, लेकिन आपकी आशंका समझ में आती है। आप हाईकोर्ट जाइए और अगर मामला बनता है तो FIR रद्द कराने की मांग कर सकते हैं। तब तक हम आपको अंतरिम सुरक्षा दे सकते हैं।"
इसके बाद पीठ ने आदेश जारी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ पहले से दर्ज FIR या भविष्य में दर्ज की जाने वाली किसी FIR के संबंध में फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
कोर्ट ने इंदिरापुरम, गाजियाबाद में दर्ज FIR की कॉपी भी अभिषेक उपाध्याय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया ताकि वह उचित राहत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख कर सकें।
मामला गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में 18 अगस्त को दर्ज FIR से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, शिप्रा मॉल के पास एक मोटरसाइकिल को बलेनो कार से कथित तौर पर टक्कर लगी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कार चालक ने उसके साथ गाली-गलौज और धमकी दी और इस मामले में अभिषेक उपाध्याय का नाम सामने आया।
अभिषेक उपाध्याय ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि 18 अगस्त को बेटी को स्कूल से लेकर लौटते समय शिप्रा मॉल के पास मोटरसाइकिल सवार एक व्यक्ति उनकी कार के पास आया और हंगामा करने लगा। उनके मुताबिक न तो कोई टक्कर हुई और न ही कोई हाथापाई हुई। बेटी के साथ होने के कारण वह वहां से चले गए।
उन्होंने शिकायत में मोटरसाइकिल के नंबर को लेकर भी विसंगति होने का दावा किया है। उनका कहना है कि FIR में जिस नंबर का उल्लेख किया गया, वह दूसरी मोटरसाइकिल का है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिसकर्मियों ने कथित घटना वाली जगह के आसपास की दुकानों पर जाकर दुकानदारों पर सीसीटीवी फुटेज हटाने या उपलब्ध नहीं कराने का दबाव बनाया।
अभिषेक उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार मांग किए जाने के बावजूद उन्हें एफआईआर की पूरी प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। याचिका के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के अनुसार एफआईआर को वेबसाइट पर भी अपलोड नहीं किया गया।
अभिषेक उपाध्याय ने आरोप लगाया कि 20 अगस्त की रात करीब एक दर्जन पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे थे जबकि वह उस समय वहां मौजूद नहीं थे। उनकी पत्नी और दो बेटियां घर पर थीं। इसके बाद उन्हें गिरफ्तारी और आगे की पुलिस कार्रवाई की आशंका हुई।
याचिका में दावा किया गया कि उनके खिलाफ कार्रवाई को उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और कथित अनियमितताओं से जुड़ी उनकी खोजी पत्रकारिता से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उनकी हालिया रिपोर्टों में राम मंदिर से जुड़े चंदे में कथित गड़बड़ी और सरकारी अधिकारियों तथा विभागों से जुड़े आरोप शामिल रहे हैं।
अभिषेक उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से FIR रद्द करने की मांग की। उन्होंने वैकल्पिक तौर पर उत्तर प्रदेश पुलिस के अलावा किसी स्वतंत्र एजेंसी, जिसमें CBI भी शामिल है, से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अदालत को बताया कि वह किसी भी वैध जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।


