SIR के खिलाफ राहुल गांधी समेत इंडिया गठबंधन के नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, कहा- एक याचिकाकर्ता को अपने आचरण पर देना होगा जवाब
Amir Ahmad
15 Oct 2026 1:31 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नौ अन्य नेताओं की याचिका पर गुरुवार को नोटिस जारी किया।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने भारतीय निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी से जवाब मांगा।
नोटिस जारी करते हुए चीफ जस्टिस ने मौखिक टिप्पणी की कि कोर्ट याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण के बारे में भी उनसे स्पष्टीकरण मांगेगा।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष SIR प्रक्रिया का विरोध कर रहा है और मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
याचिका दायर करने से पहले 12 अक्टूबर को राहुल गांधी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।
बताया गया कि राहुल गांधी स्वयं याचिका पेश करना चाहते थे लेकिन मार्च के दौरान सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री बंद होने का समय नजदीक होने के कारण वकीलों के माध्यम से याचिका दाखिल की गई।
याचिका दाखिल होने के बाद भी विपक्षी नेता रजिस्ट्री पहुंचे जिसके चलते परिसर में भारी भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हुई।
राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा याचिकाकर्ताओं में तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (UBT) के संजय राउत, माकपा के एमए बेबी, भाकपा के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं। बाद में विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) के अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद सज्जाद अहमद किचलू भी राहुल गांधी की याचिका में शामिल हो गए।
सुप्रीम कोर्ट ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की ओर से दायर अलग-अलग याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया।
याचिका में क्या मांग की गई
विपक्षी नेताओं की याचिका में चुनाव आयोग से SIR प्रक्रिया से संबंधित पूरा रिकॉर्ड पेश करने, निर्णय लेने की प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा करने और चुनाव कानूनों के अनुरूप पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई।
याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के उस फैसले से संबंधित पूरी फाइल मांगी है, जिसके तहत SIR शुरू करने का निर्णय लिया गया।
याचिका में यह भी जांचने का अनुरोध किया गया कि आयोग के फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 और टी.एन. शेषन मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप थे या नहीं। याचिकाकर्ताओं ने उन फैसलों को रद्द करने की मांग की, जिन्हें उनके अनुसार वैधानिक अधिकार के बिना लिया गया।
याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि मामला लंबित रहने के दौरान SIR से जुड़े सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएं और 2023 के कानून की धारा 18 के अनुरूप उनका विधिवत रिकॉर्ड रखा जाए। इसके अलावा ऑनलाइन फॉर्म-6 को मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के अनुरूप बनाने की मांग की गई है, जब तक कि इन नियमों में संशोधन नहीं किया जाता।
विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों और चुनावी डेटाबेस तक पहुंच की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में समिति गठित करने का अनुरोध भी किया।
याचिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से जुड़ी प्रक्रियाओं की अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर समीक्षा की मांग भी शामिल है।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम बूथवार प्रकाशित किए जाने चाहिए। साथ ही, नाम हटाने के कारण, उम्र और लिंग के आधार पर आंकड़े तथा हटाए गए नामों को दोबारा शामिल कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
याचिका में यह सुनिश्चित करने की मांग की गई कि किसी भी मतदाता का नाम नोटिस दिए बिना और सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना मतदाता सूची से न हटाया जाए।
इसके अलावा पंजाब और अन्य चुनाव वाले राज्यों में पात्र लोगों को मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन की अंतिम तारीख तक अवसर देने का अनुरोध किया गया।
विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी मांग की है कि याचिका पर अंतिम फैसला आने तक सभी राज्यों में SIR प्रक्रिया स्थगित रखी जाए।
चीफ जस्टिस से मुलाकात का अनुरोध पहले किया गया था
इससे पहले राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा करने के लिए चीफ जस्टिस सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था।
दोनों नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए अपनी चिंताओं से संबंधित ज्ञापन भी सौंपना चाहते थे।
हालांकि चीफ जस्टिस ने मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर चर्चा की मांग की जा रही है, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, लेकिन नेता उचित राहत के लिए न्यायिक प्रक्रिया के तहत कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
SIR से संबंधित अन्य याचिकाओं पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है। चीफ जस्टिस ने पहले संकेत दिया था कि विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका पर भी लंबित मामलों के साथ विचार किया जा सकता है।

