SBI कर्ज विवाद खत्म करने के लिए अतिबिर इंडस्ट्रीज को 375 करोड़ चुकाने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
Amir Ahmad
30 Oct 2026 4:54 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने अतिबिर इंडस्ट्रीज कंपनी लिमिटेड को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से जुड़े कर्ज विवाद का पूर्ण और अंतिम निपटारा करने के लिए एक परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी (ARC) को अतिरिक्त 125 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया। कंपनी पहले ही 250 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है। इस तरह कुल भुगतान 375 करोड़ रुपये होगा। हालांकि, अदालत ने कंपनी के कर्ज खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित करने और बाद में कर्ज को एआरसी को हस्तांतरित करने की वैधता से जुड़े कानूनी सवालों को खुला रखा।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई के दौरान दिया। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने SBI द्वारा खाते को NPA घोषित करने और उससे जुड़ी आगे की कार्रवाई को रद्द कर दिया था, लेकिन खंडपीठ ने उस फैसले को पलट दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की विशेष परिस्थितियों, बीते समय और पक्षकारों के हितों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत को देखते हुए वह किसी कानूनी मुद्दे या पक्षकारों के आचरण पर राय दिए बिना अतिरिक्त 125 करोड़ रुपये के भुगतान का निर्देश दे रहा है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राशि SBI द्वारा एआरसी को हस्तांतरित किए गए कर्ज से संबंधित कंपनी की सभी देनदारियों के पूर्ण और अंतिम निपटारे के लिए होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस सवाल पर विचार नहीं कर रही है कि यह रकम निवेश पर मिलने वाला प्रतिफल है या किसी अन्य आधार पर देय है।
अतिबिर इंडस्ट्रीज ने SBI के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह से ऋण सुविधाएं ली थीं। SBI ने 16 अक्टूबर 2020 से कंपनी के ऋण खाते को NPA घोषित किया। इसके बाद 24 मार्च 2023 को 250 करोड़ रुपये में कर्ज ARC को हस्तांतरित कर दिया गया।
कंपनी ने NPA घोषित किए जाने को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि भारतीय रिजर्व बैंक की कोविड-19 महामारी से जुड़ी राहत और भुगतान स्थगन व्यवस्था के तहत पुनर्भुगतान की मोहलत 31 अगस्त 2020 तक बढ़ाई गई। ऐसे में 16 अक्टूबर 2020 से खाते को NPA घोषित करना समय से पहले था। कंपनी ने कर्ज हस्तांतरण की वैधता पर भी सवाल उठाए।
कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने कंपनी की चुनौती स्वीकार करते हुए NPA वर्गीकरण और उससे जुड़ी कार्रवाई रद्द की थी। हालांकि, खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को पलट दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट में पक्षकारों की दलीलें मुख्य रूप से जस्टिस डेव की रिपोर्ट और इस सवाल पर केंद्रित रहीं कि क्या ARC को अतिबिर इंडस्ट्रीज से पहले ही प्राप्त 250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पाने का अधिकार है।
जस्टिस मोहना द्वारा लिखे गए फैसले में अदालत ने कंपनी को अतिरिक्त 125 करोड़ रुपये का भुगतान 12 सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि कुल 375 करोड़ रुपये का भुगतान SBI से हस्तांतरित कर्ज से जुड़े सभी दावों का पूर्ण और अंतिम निपटारा होगा।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पूरी राशि प्राप्त होने के बाद प्रतिवादी चार सप्ताह के भीतर कंपनी के संपत्ति संबंधी मूल दस्तावेज लौटा दें और उसकी प्रतिभूतियों तथा गारंटियों को मुक्त कर दें।
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 की धारा 7 के तहत राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) में लंबित कार्यवाही और ऋण वसूली अधिकरण (DRT) में चल रही वसूली कार्यवाही को भी अपने निर्देशों के मद्देनजर समाप्त करने का आदेश दिया।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अतिबिर इंडस्ट्रीज 12 सप्ताह के भीतर अतिरिक्त 125 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करती है तो प्रतिवादी उसके खिलाफ कार्यवाही दोबारा शुरू करने के लिए स्वतंत्र होंगे। ऐसी स्थिति में कंपनी को इस फैसले के तहत दिए गए समझौते का लाभ नहीं मिलेगा।

