अगस्ता वेस्टलैंड मामला: ED के गैर-जमानती वारंट के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस, श्रवण गुप्ता को नहीं मिली राहत
Amir Ahmad
18 July 2026 3:25 PM IST

अगस्ता वेस्टलैंड VVIP हेलिकॉप्टर सौदा मामले से जुड़े धनशोधन प्रकरण में आरोपी पूर्व MGF समूह के चेयरमैन श्रवण गुप्ता ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट को चुनौती देने वाली अपनी याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस ली।
इसके साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट का वह फैसला बरकरार रहेगा, जिसमें गैर-जमानती वारंट को वैध ठहराया गया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता के सीनियर एडवोकेट द्वारा याचिका वापस लेने का अनुरोध स्वीकार करते हुए विशेष अनुमति याचिका को वापस लिया हुआ मानकर खारिज किया।
श्रवण गुप्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट के 4 नवंबर 2025 के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत ED की जांच के दौरान जारी खुली अवधि वाले गैर-जमानती वारंट रद्द करने से इनकार कर दिया गया।
ED का आरोप है कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे में कथित कमीशन की धनशोधन प्रक्रिया के तहत विदेशी कंपनियों के माध्यम से करीब 24 करोड़ रुपये की अवैध राशि श्रवण गुप्ता को मिली।
एजेंसी का कहना है कि नवंबर 2019 में भारत छोड़ने के बाद उन्होंने बार-बार जारी किए गए समनों के बावजूद जांच में शामिल होने से परहेज किया।
ED के अनुसार श्रवण गुप्ता के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जारी है और अगस्त 2023 में उनके खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस भी जारी किया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट में श्रवण गुप्ता का कहना था कि उन्होंने हर समन का जवाब दिया और मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए।
उनका दावा था कि नवंबर 2019 में कारोबारी काम से ब्रिटेन जाने के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और फिर कोरोना महामारी के कारण वह भारत नहीं लौट सके।
उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल होने की इच्छा भी जताई। उनका तर्क था कि जांच मुख्य रूप से दस्तावेजों पर आधारित है इसलिए उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है।
वहीं ED ने अदालत को बताया कि बैंक रिकॉर्ड से पता चलता है कि मॉरीशस स्थित एक कंपनी को मिले कथित अपराध की आय का एक हिस्सा श्रवण गुप्ता से जुड़ी कंपनियों में स्थानांतरित किया गया।
एजेंसी ने यह भी कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड सौदे के कथित बिचौलियों में शामिल गुइडो हाश्के उस कंपनी में गैर-कार्यकारी निदेशक थे, जहां श्रवण गुप्ता प्रबंध निदेशक थे।
ED ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान एकत्र किए गए बड़ी मात्रा में दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों के संबंध में पूछताछ के लिए श्रवण गुप्ता की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी थी।
एजेंसी ने यह भी कहा कि भारत छोड़ने के बाद जारी नौ समनों की उन्होंने अनदेखी की और उनके तथा उनके परिवार द्वारा डोमिनिका राष्ट्रमंडल की नागरिकता के लिए आवेदन करना भी जांच से बचने के प्रयास को दर्शाता है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि गैर-जमानती वारंट व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं, इसलिए उनका उपयोग सावधानी से होना चाहिए। लेकिन यदि कोई आरोपी जानबूझकर जांच से बचता है तो जांच के दौरान भी अदालत ऐसे वारंट जारी कर सकती है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा अदालत की कार्यवाही और साक्ष्य दर्ज करने को सुगम बनाने के लिए है। किसी आरोपी को यह अधिकार नहीं है कि वह स्वयं तय करे कि जांच किस तरीके से होगी। यदि हिरासत में पूछताछ और साक्ष्यों से आमना-सामना कराना आवश्यक हो, तो उसकी जगह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नहीं ले सकती।
सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लिए जाने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला यथावत बना रहेगा और श्रवण गुप्ता के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट प्रभावी रहेंगे।


