BREAKING: चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, घड़ियालों पर खतरे को लेकर स्वतः संज्ञान
Amir Ahmad
13 March 2026 12:17 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन और उससे संकटग्रस्त जलीय जीवों, खासकर घड़ियालों पर पड़ रहे खतरे को लेकर स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने इस मामले को आगे की कार्रवाई के लिए चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष रखने का निर्देश दिया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मुद्दे को उठाया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने बताया कि हाल ही में प्रकाशित समाचार रिपोर्टों और एक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि जिस संरक्षित क्षेत्र में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम चल रहा है, वहां बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन किया जा रहा है।
जस्टिस मेहता ने कहा,
“हमने हाल की कुछ समाचार रिपोर्टों और एक रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया कि घड़ियाल संरक्षण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन हो रहा है। इसके कारण घड़ियालों को अपने निवास स्थान बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यहां तक कि जिस क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने घड़ियाल छोड़े थे वह भी अवैध खनन की चपेट में आ गया।”
खंडपीठ ने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया है और मामले को आगे के निर्देशों के लिए चीफ जस्टिस के समक्ष रखा जाएगा।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा के पास स्थित है। इसे वर्ष 1979 में अधिसूचित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य तेजी से घटती घड़ियालों की संख्या की रक्षा करना और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना है।

