नियमों के पालन का निर्देश देना फैसला सुनाना नहीं: TRAI के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
Amir Ahmad
25 July 2026 2:57 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के अधिकारों को स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी सेवा प्रदाता को कानून और नियमों का पालन करने का निर्देश देना विवाद का फैसला सुनाना नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि TRAI का ऐसा निर्देश उसके नियामकीय अधिकारों का हिस्सा है और इससे दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय अधिकरण (TDSAT) के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं होता।
जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने TDSAT का फैसला रद्द किया, जिसमें ट्राई के निर्देश जारी करने के अधिकार पर सवाल उठाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा,
"किसी नियम का पालन करने का निर्देश TRAI के नियामकीय दायित्व का हिस्सा है। यह पक्षकारों के बीच किसी विवाद का निपटारा नहीं है। इसलिए न तो ऐसा निर्देश और न ही कारण बताओ नोटिस निर्णयन की श्रेणी में आता है।"
मामला एक मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (MSO) और स्थानीय केबल ऑपरेटरों के बीच विवाद से जुड़ा था। स्थानीय केबल ऑपरेटरों ने शिकायत की थी कि MSO ने बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए अचानक उनके केबल टेलीविजन सिग्नल बंद कर दिए।
हाईकोर्ट के निर्देश पर TRAI ने मामले की जांच की और एमएसओ को तुरंत सिग्नल बहाल करने तथा 10 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
बाद में पुलिस आयुक्त की रिपोर्ट में TRAI के आदेश का पालन न होने की बात सामने आने पर ट्राई ने MSO को कारण बताओ नोटिस जारी किया और पूछा कि उसके खिलाफ कानून के तहत अदालत में शिकायत क्यों न की जाए।
MSO ने इस नोटिस को टीडीसैट में चुनौती देते हुए कहा कि TRAI ने इस तरह विवाद का फैसला सुनाने का काम किया, जबकि ऐसा अधिकार केवल TDSAT को है। TDSAT ने यह दलील स्वीकार करते हुए TRAI का कारण बताओ नोटिस निरस्त कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस निष्कर्ष को गलत ठहराते हुए कहा कि ट्राई ने न तो पक्षकारों के बीच व्यावसायिक विवाद का निपटारा किया न किसी को हर्जाना दिया न बकाया राशि तय की और न ही किसी पक्ष के अधिकारों का अंतिम निर्धारण किया। उसने केवल संबंधित नियमों के पालन का निर्देश दिया था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि TRAI को कानून के तहत नियमों और लाइसेंस शर्तों के पालन के लिए निर्देश जारी करने का अधिकार है। यदि ऐसे निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है, तो ट्राई केवल शिकायतकर्ता के रूप में सक्षम अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। दोष तय करना, जुर्माना लगाना या दंड देना केवल सक्षम अदालत का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि मामला दो सेवा प्रदाताओं के बीच संविदात्मक या व्यावसायिक विवाद का है, तो उसका निपटारा TDSAT ही करेगा। लेकिन जहां केवल नियामकीय नियमों के पालन का प्रश्न हो, वहां TRAI अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकती है।
इन टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने TRAI की अपील स्वीकार करते हुए TDSAT का फैसला रद्द किया।


