मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Amtek Group के प्रमोटर अरविंद धाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत
Amir Ahmad
6 Jan 2026 12:43 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कथित रूप से करीब 27,000 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Amtek Group के प्रमोटर अरविंद धाम को जमानत दी।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार करते हुए यह राहत प्रदान की, जिसमें धाम को नियमित जमानत देने से इनकार किया गया था।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की दिसंबर, 2022 की FIR पर आधारित है।
ये FIR बैंक ऑफ महाराष्ट्र और आईडीबीआई बैंक की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं, जिनमें अमटेक ग्रुप की कंपनियों पर ऋण राशि के दुरुपयोग और डायवर्जन का आरोप लगाया गया था।
ED के अनुसार अमटेक ऑटो लिमिटेड, एसीआईएल लिमिटेड, मेटालिस्ट फोर्जिंग लिमिटेड, कास्टेक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और एआरजीएल लिमिटेड जैसी कंपनियों ने भारतीय स्टेट बैंक, आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और करूर वैश्य बैंक समेत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कंसोर्टियम से 26,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लिया था। बाद में ये खाते एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) में बदल गए।
जांच एजेंसी का आरोप है कि दिवाला कार्यवाही के दौरान कराए गए फॉरेंसिक और लेन-देन ऑडिट में यह सामने आया कि वर्ष 2012-13 से ही ऋण की रकम का उपयोग घोषित उद्देश्यों के बजाय अन्यत्र किया गया।
ED का कहना है कि फर्जी बिक्री-खरीद, झूठे डेबिट नोट और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए मूल्यांकन के जरिये 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को गलत तरीके से दर्शाया गया, ताकि बैंकों से और अधिक कर्ज लिया जा सके।
एजेंसी का यह भी आरोप है कि ऋण की बड़ी राशि को अरविंद धाम और उनके परिवार के नियंत्रण वाली 500 से अधिक समूह और शेल कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर किया गया। इन कंपनियों में कथित तौर पर डमी निदेशक नियुक्त थे और वास्तविक नियंत्रण छिपाने के लिए जटिल कॉर्पोरेट ढांचे, पारिवारिक ट्रस्ट और प्रॉक्सी शेयरधारकों का इस्तेमाल किया गया। इस धन का उपयोग जमीन और रियल एस्टेट खरीदने, सूचीबद्ध व गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश करने और संबंधित पक्षों को हस्तांतरण के लिए किया गया।
ED ने दावा किया कि अरविंद धाम, समूह के प्रमोटर और नियंत्रक दिमाग के रूप में कथित अपराध से अर्जित धन के अंतिम लाभार्थी है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अमटेक ग्रुप से जुड़े कथित 27,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक घोटाले की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सार्वजनिक धन के भूमि और रियल एस्टेट में डायवर्जन की ओर प्रथम दृष्टया संकेत मिलने की बात कही थी और विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे।
जांच के दौरान जून, 2024 में कई ठिकानों पर तलाशी ली गई, जिनमें संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, नकदी और आभूषण जब्त किए गए। बाद में 5,100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया।
सितंबर, 2024 में ED ने विशेष PMLA कोर्ट में अभियोजन शिकायत दाखिल की।
अरविंद धाम को जुलाई, 2024 में गिरफ्तार किया गया था।
विशेष अदालत ने जनवरी, 2025 में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने यह कहते हुए जमानत से इनकार किया कि मामला देश के सबसे बड़े आर्थिक अपराधों में से एक है, कुल बकाया बैंक ऋण 38,760 करोड़ रुपये है और धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 45 की शर्तें पूरी नहीं होतीं। अदालत ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी जताई थी।
इसके बाद अरविंद धाम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट ने अब उन्हें जमानत दी।

