प्रधानमंत्री और पहलगाम आतंकी हमले पर पोस्ट मामले में लोकगायिका नेहा सिंह राठौर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम संरक्षण
Amir Ahmad
7 Jan 2026 3:43 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में लोकगायिका नेहा सिंह राठौर को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। न्यायालय ने यह राहत उस FIR के संबंध में दी है, जो उनके विरुद्ध दर्ज की गई।
जस्टिस जे. के. महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने नेहा सिंह राठौर की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि उनके विरुद्ध कोई दमनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह याचिका इलाहाबाद हाइकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत से इनकार किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नेहा सिंह राठौर को जांच अधिकारी के समक्ष जब भी बुलाया जाए, उपस्थित होना होगा।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि वह पहली बार 19 जनवरी को जांच अधिकारी के समक्ष पेश हों। न्यायालय ने यह भी कहा कि अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि नेहा सिंह राठौर जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं।
वहीं उनकी ओर से पेश वकील ने इस दावे का खंडन करते हुए बताया कि वह 3 जनवरी को जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित हो चुकी हैं।
उल्लेखनीय है कि नेहा सिंह राठौर के विरुद्ध दर्ज FIR में आरोप लगाया गया कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, जिसमें 26 पर्यटकों की हत्या हुई, उन्होंने अपने सोशल मीडिया खाते पर कथित रूप से भारत विरोधी बयान पोस्ट किए।
अभियोजन का कहना है कि ऐसे समय में, जब सरकार स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही थी और कड़े प्रतिबंध लागू थे, उन्होंने लगातार ऐसी टिप्पणियां कीं, जो राष्ट्रीय अखंडता को प्रभावित करने और धर्म व जाति के आधार पर लोगों को भड़काने वाली थीं।
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने अपने आदेश में नेहा सिंह राठौर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनके द्वारा किए गए पोस्ट प्रधानमंत्री के विरुद्ध थे और उनमें प्रधानमंत्री के नाम का कथित रूप से अपमानजनक तरीके से उपयोग किया गया।
हाइकोर्ट ने यह भी कहा था कि यद्यपि संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन यह सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता के हित में युक्तिसंगत प्रतिबंधों के अधीन है।
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया था कि ये टिप्पणियां उस संवेदनशील समय पर की गईं, जब 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी।
यह आदेश उस समय पारित किया गया, जब करीब ढाई महीने पहले हाइकोर्ट ने इस मामले में दर्ज FIR को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी थी, जिसमें भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

