गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट ने मालिकों की जमानत रद्द करने का फैसला बरकरार रखा
Amir Ahmad
31 Aug 2026 1:09 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने गोवा के अर्पोरा स्थित बिर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब के सह-मालिक सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता को दी गई जमानत रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार किया। बता दें, नाइटक्लब में लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हुई थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने तीनों आरोपियों की ओर से दायर याचिकाओं पर संक्षिप्त सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।
आरोपियों की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे और श्याम दीवान पेश हुए।
बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस नीला गोखले ने 18 अगस्त को तीनों को दी गई जमानत रद्द की थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि सत्र अदालत ने जमानत देते समय अपने विवेकाधिकार का उचित तरीके से इस्तेमाल नहीं किया। हाईकोर्ट ने तीनों को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सौरभ और गौरव लूथरा की ओर से पेश सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि ऐसा कोई कृत्य उनके मुवक्किलों की ओर से नहीं किया गया, जिससे 25 लोगों की मौत हुई हो। उन्होंने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 के दूसरे भाग के तहत लगाए गए आरोप पर सवाल उठाया।
दवे ने कहा कि धारा 299 के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला बनाने के लिए आरोपी की ओर से ऐसा कोई कृत्य होना चाहिए, जिससे मौत हुई हो। उनके मुताबिक, अभियोजन पक्ष अधिक से अधिक लापरवाही से मौत के मामले को साबित करने की कोशिश कर सकता है।
उन्होंने कहा कि धारा 304 के दूसरे भाग को इस मामले में लागू नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, अगर अभियोजन पक्ष का मामला आगे बढ़ता भी है तो अधिकतम लापरवाही से मौत का आरोप बन सकता है, जिसके लिए भारतीय न्याय संहिता, 2024 (BNS) के तहत सजा बढ़ाकर पांच साल की गई।
दवे ने यह भी कहा कि जमानत रद्द करते समय हाईकोर्ट ने इस बात को ध्यान में रखा था कि सत्र अदालत ने आरोपियों की जांच अधिकारियों के सामने नियमित उपस्थिति की शर्त नहीं लगाई। इसके अलावा देश के भीतर यात्रा करने से पहले अदालत की अनुमति लेने की शर्त भी नहीं लगाई गई।
उनका कहना था कि अगर इन्हीं शर्तों की वजह से हाईकोर्ट ने जमानत रद्द की है तो अब ये शर्तें लगाई जा सकती हैं। दवे ने यह भी कहा कि लूथरा बंधु फिलहाल यात्रा करने के इच्छुक नहीं हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने संक्षेप में कहा,
"खारिज।"
इसके बाद अजय गुप्ता की ओर से पेश श्याम दीवान ने आत्मसमर्पण के लिए दो सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह समय मंजूर कर दिया। साथ ही कोर्ट ने मुकदमे में आरोप तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश भी दिया।
मामला गोवा के अर्पोरा इलाके में स्थित नाइटक्लब में लगी भीषण आग से जुड़ा है। आग की इस घटना में 25 लोगों की मौत हुई। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद तीनों आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के आदेश के बाद तीनों आरोपियों को अब हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार आत्मसमर्पण करना होगा।
कोर्ट ने साथ ही निचली अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की दिशा में मुकदमे में तेजी लाने को कहा।


