CJI पर टिप्पणी से जुड़े अवमानना मामले में निखिल वागले को वर्चुअली, संजय राउत को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश

  • CJI पर टिप्पणी से जुड़े अवमानना मामले में निखिल वागले को वर्चुअली, संजय राउत को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पत्रकार निखिल वागले को वर्चुअल माध्यम से और शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और न्यायपालिका के खिलाफ कथित टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से दायर आपराधिक अवमानना याचिका से जुड़ा है।

    जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने दोनों को 17 नवंबर को दोपहर 2 बजे पेश होने का निर्देश दिया। एससीबीए ने भारत के अटॉर्नी जनरल से लिखित सहमति मिलने के बाद याचिका दायर की थी। अटॉर्नी जनरल ने संबंधित टिप्पणियों को प्रथम दृष्टया अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया था।

    सुनवाई के दौरान SCBA की ओर से सीनियर एडवोकेट प्रदीप राय और राहुल कौशिक के साथ एडवोकेट प्रज्ञा बघेल और मीनेश दुबे पेश हुए। उन्होंने कथित अवमाननाकर्ताओं की सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि इन टिप्पणियों से देश की सर्वोच्च अदालत के प्रति सम्मान की कमी दिखाई देती है।

    पत्रकार निखिल वागले की ओर से सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि वागले ने अपनी पोस्ट के लिए ईमानदारी से बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने कहा कि पत्रकार का पांच दशक से अधिक का करियर बेदाग रहा है और अवमानना का नोटिस मिलने के बाद उन्होंने पोस्ट हटा दी थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वागले अपने कृत्य को सही ठहराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।

    हालांकि, SCBA के सदस्यों ने कहा कि पोस्ट नोटिस मिलने के तुरंत बाद नहीं, बल्कि पांच दिन की देरी से हटाई गई थी।

    बेंच ने माफी और पोस्ट हटाए जाने पर ध्यान दिया।

    जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि वागले ने अपने कृत्य पर पछतावा जताया है, इसलिए उन्हें अदालत में उपस्थित रहना चाहिए। इंदिरा जयसिंह ने स्पष्ट किया कि वागले पहले कानूनी सलाह के कारण पेश नहीं हुए, जबकि वे उपस्थित होने के लिए तैयार थे। चूंकि वह मुंबई में रहते हैं, इसलिए उन्हें वर्चुअल माध्यम से पेश होने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया।

    कोर्ट ने फिलहाल वागले को वर्चुअल रूप से पेश होने की अनुमति दी। हालांकि, जरूरत पड़ने पर भविष्य में उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी बुलाया जा सकता है।

    सुनवाई के दौरान संजय राउत की ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ, हालांकि एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड विष्णु शर्मा ने उनकी ओर से वकालतनामा दाखिल किया था। कोर्ट ने राउत को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया।

    SCBA के सदस्यों ने राउत की एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट का भी उल्लेख किया। इसमें कथित तौर पर कहा गया था कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट के साथ भी अल्बानिया के सुप्रीम कोर्ट जैसी घटना हो सकती है, जिसे प्रदर्शनकारियों ने जला दिया था।

    जस्टिस अरविंद कुमार ने टिप्पणी की कि यह मामला पूरी न्यायपालिका की संस्था से संबंधित है।

    सुनवाई के दौरान इंदिरा जयसिंह ने कहा कि न्यायिक संस्था को कानूनी बिरादरी के स्नेह का जवाब देना चाहिए और असंतोष व्यक्त करने के लिए भी जगह होनी चाहिए।

    इस पर जस्टिस कुमार ने कहा कि न्यायपालिका दूसरों के लिए खड़ी रही है और सभी ने मिलकर दूसरों का साथ दिया।

    कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निखिल वागले की ओर से दाखिल हलफनामे और कारण बताओ नोटिस से राहत देने के अनुरोध पर विचार किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अगली सुनवाई पर वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया जाता है।

    कोर्ट ने राउत के जवाबी हलफनामे का रिकॉर्ड पर उपलब्ध न होने का भी उल्लेख किया और रजिस्ट्री को उसे रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।

    SCBA की याचिका के मुताबिक दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के संबंध में विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से सीजेआई के इनकार के बाद निखिल वागले ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से सीजेआई के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट की थी।

    SCBA ने अदालत की अवमानना अधिनियम की धारा 15 के तहत दायर याचिका में कहा कि बड़े जनसमूह तक पहुंच रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार की ओर से सोशल मीडिया पर जानबूझकर की गई ऐसी पोस्ट सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती है और उसके अधिकार को कमतर करने की प्रवृत्ति रखती है।

    याचिका में संजय राउत पर भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने जजों के सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने और मुख्यमंत्रियों की ओर से आयोजित रात्रिभोज में जाने को लेकर कथित तौर पर गलत बयान दिए।

    SCBA ने यह भी कहा कि राउत ने लंदन में राजनीतिक हस्तियों के साथ जजों के बैडमिंटन खेलने की कथित तस्वीरों का हवाला देते हुए CJI और अन्य जजों पर आरोप लगाए। ये टिप्पणियां SIR मुद्दे पर विपक्षी नेताओं से मिलने से CJI के इनकार की आलोचना के संदर्भ में की गई थीं।

    अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति देते हुए कहा कि संबंधित टिप्पणियां प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट, विशेषकर CJI, की प्रतिष्ठा कम करने के इरादे से की गई प्रतीत होती हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि लंदन में जजों के बैडमिंटन खेलने से संबंधित टिप्पणियों को दिल्ली हाईकोर्ट गलत ठहरा चुका है।

    इसके बाद SCBA अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट प्रदीप राय के अनुरोध पर अवमानना याचिका दायर की गई। बाद में निखिल वागले ने अपनी टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा था कि वह भावनाओं में बहकर की गई प्रतिक्रिया थी और उन्होंने पोस्ट हटा दी है।

    मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजे होगी।


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