सोनम वांगचुक की सेहत ठीक, एम्स जोधपुर में मिल रहा सर्वोत्तम इलाज: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

Amir Ahmad

9 Feb 2026 4:05 PM IST

  • सोनम वांगचुक की सेहत ठीक, एम्स जोधपुर में मिल रहा सर्वोत्तम इलाज: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

    सुप्रीम कोर्ट को सोमवार को केंद्र सरकार ने मौखिक रूप से अवगत कराया कि लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की हिरासत की समीक्षा को लेकर अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है।

    केंद्र की ओर से कहा गया कि वांगचुक की सेहत पूरी तरह ठीक है और उन्हें एम्स जोधपुर में सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है, जो लद्दाख में संभव नहीं होता।

    अदालत इस उत्तर से असंतुष्ट दिखाई दी और वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर अपनी चिंता दोहराई।

    गौरतलब है कि अदालत सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई कर रही है।

    यह याचिका उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो द्वारा दायर की गई, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 के तहत वांगचुक की हिरासत को अवैध घोषित करने की मांग की गई।

    जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष, दोपहर के भोजनावकाश से पहले एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने यह कहते हुए स्थगन मांगा कि वह किसी अन्य मामले में व्यस्त हैं। अदालत को यह मामला दोपहर 2 बजे सुनना था।

    स्थगन अनुरोध पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस कुमार ने कहा कि इससे पहले भी केंद्र सरकार के अनुरोध पर सुनवाई टाली गई और पिछले शुक्रवार को पीठ रद्द होने के कारण मामला नहीं सुना जा सका।

    इसके बाद जस्टिस कुमार ने सीधे सवाल किया कि क्या अदालत के कहने पर वांगचुक की सेहत को देखते हुए उनकी हिरासत की समीक्षा को लेकर कोई कदम उठाया गया।

    जस्टिस कुमार ने पूछा,

    “क्या हुआ? कोई प्रगति? क्या कुछ किया गया।"

    इस पर एएसजी ने जवाब दिया,

    “मैं प्रस्तुत करूँगा… नहीं, अब तक कुछ नहीं किया गया।”

    याचिकाकर्ता पक्ष के एक वकील ने अदालत में कहा कि वांगचुक लगातार अस्वस्थ हैं और ऐसे में उनकी हिरासत पर पुनर्विचार का यह उपयुक्त समय है।

    जस्टिस वराले ने कहा,

    “पिछली बार भी हमने यही सुझाव दिया था।”

    उल्लेखनीय है कि 4 फरवरी को जस्टिस वराले ने एएसजी से यह निर्देश लेने को कहा था कि क्या केंद्र सरकार यह देखते हुए कि वांगचुक पांच महीने से हिरासत में हैं उनकी नजरबंदी की समीक्षा कर सकती है।

    यह सुनवाई सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल (डॉ. आंगमो की ओर से) द्वारा दायर उस आवेदन के बाद हो रही है, जिसमें अनुरोध किया गया कि वांगचुक की जांच किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से कराई जाए, क्योंकि उन्होंने बार-बार पेट दर्द की शिकायत की थी संभवतः दूषित पानी के कारण।

    अदालत के निर्देश पर एम्स जोधपुर के डॉक्टरों ने उनकी जांच की और रिपोर्ट अदालत में पेश की गई।

    ASG नटराज ने कहा कि वांगचुक की सेहत पूरी तरह ठीक है और उन्हें एम्स जोधपुर में बेहतरीन इलाज मिल रहा है।

    इस पर जस्टिस वराले ने टिप्पणी की,

    “मुद्दे हैं आप भी इससे इनकार नहीं कर रहे हैं। वह खुद भी सेहत संबंधी शिकायत कर रहे हैं। डॉक्टर कह रहे हैं कि समस्या है और उसका इलाज चल रहा है। यह स्वीकार तथ्य है कि स्वास्थ्य समस्या है और पिछली बार ही हमने अनुरोध किया था।”

    एएसजी ने दलील दी कि सेहत के लिहाज से लद्दाख की तुलना में राजस्थान बेहतर है।

    उन्होंने कहा,

    “लद्दाख में कुछ नहीं होता जबकि राजस्थान में एम्स है।”

    इस पर जस्टिस वराले ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

    “नहीं, नहीं, आप ऐसा नहीं कह सकते।”

    एएसजी ने आग्रह किया कि मामले को परसों के बाद सूचीबद्ध किया जाए।

    इस पर जस्टिस कुमार ने कहा,

    “यह हैबियस कॉर्पस का मामला है नटराज। आपको इसकी गंभीरता समझनी चाहिए। आप ऐसा नहीं कह सकते। शुक्रवार को हम इसे नहीं सुन सके थे।”

    हालांकि अदालत ने मामले को बुधवार को सूचीबद्ध करने की अनुमति दी लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि आगे कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा।

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