जज और युवा वकील के बीच विवाद: युवा वकीलों के प्रति जजों को धैर्य और प्रोत्साहन दिखाना चाहिए- सुप्रीम कोर्ट

Amir Ahmad

11 May 2026 4:15 PM IST

  • जज और युवा वकील के बीच विवाद: युवा वकीलों के प्रति जजों को धैर्य और प्रोत्साहन दिखाना चाहिए- सुप्रीम कोर्ट


    सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में जज और युवा वकील के बीच हुए विवाद पर सुनवाई करते हुए कहा कि न्यायपालिका के सभी स्तरों पर जजों को विशेष रूप से युवा वकीलों के प्रति धैर्य, संवेदनशीलता और प्रोत्साहन का भाव रखना चाहिए।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। मामला उस वायरल वीडियो से जुड़ा था, जिसमें आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस टी राजशेखर राव एक युवा वकील को पुलिस हिरासत में भेजने की चेतावनी देते दिखाई दिए थे।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अब किसी अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और बार एसोसिएशन के हस्तक्षेप से विवाद सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया।

    अदालत ने यह भी नोट किया कि जज की मौखिक टिप्पणियां किसी लागू किए जा सकने वाले आदेश में परिवर्तित नहीं हुईं। अदालत के अनुसार जज को यह लगा था कि युवा वकील ने गुस्से में फाइलें पोडियम पर फेंकी थीं, जबकि वकील का कहना था कि फाइलें उसके हाथ से गलती से गिर गई थीं।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा,

    “न्यायपालिका के सभी सदस्यों को विशेषकर बार के युवा सदस्यों के प्रति धैर्य, करुणा और प्रोत्साहन की भावना दिखानी चाहिए।”

    खंडपीठ ने कहा कि सीनियर वकीलों का यह दायित्व है कि वे अनुशासन, पेशेवर नैतिकता और निरंतर अध्ययन की भावना विकसित करें, लेकिन यह जिम्मेदारी केवल बार की नहीं बल्कि खंपीठ की भी है कि युवा वकीलों में कर्तव्य और ईमानदारी की भावना विकसित की जाए।

    सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को भी सावधानी बरतने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि सुनवाई के वीडियो के छोटे और संदर्भहीन अंश प्रसारित करने से अनावश्यक पूर्वाग्रह पैदा हो सकता है।

    अदालत ने कहा,

    “मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। संदर्भ से काटकर वीडियो प्रसारित करने से अनचाहा नुकसान हो सकता है। हम अपेक्षा करते हैं कि मीडिया अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करेगा।”

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए आंतरिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए और युवा वकीलों को प्रोत्साहित करने के लिए भी तंत्र विकसित होना चाहिए।

    इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,

    “हम भी न्यायपालिका के हर स्तर पर यह संवेदनशीलता विकसित कर रहे हैं कि युवा वकीलों को कैसे प्रोत्साहित किया जाए।”

    सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट्स को शिकायत निवारण समितियां गठित करने का सुझाव भी दिया। अदालत ने कहा कि इन समितियों में बार काउंसिल और बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। यह समितियां जिला और तहसील स्तर पर भी बनाई जानी चाहिए।

    अदालत ने कहा कि इससे बार और न्यायपालिका के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों का समय पर और सौहार्दपूर्ण समाधान हो सकेगा।

    यह मामला चार मई की उस घटना से जुड़ा था, जिसमें वायरल वीडियो में जस्टिस टी राजशेखर राव युवा वकील को फटकार लगाते हुए पुलिस बुलाने की बात कहते दिखाई दिए। बाद में बार के हस्तक्षेप के बाद संबंधित आदेश वापस ले लिया गया।

    बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी इस घटना को “गंभीर रूप से चिंताजनक” बताया था और संबंधित जज के खिलाफ प्रशासनिक कदम उठाने की मांग की थी।

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