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सुप्रीम कोर्ट ने दसवीं कक्षा के मूल्यांकन में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाली छात्रों की याचिका पर सीबीएसई स्कूल को नोटिस जारी किया

LiveLaw News Network
17 Jan 2022 9:06 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने दसवीं कक्षा के मूल्यांकन में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाली छात्रों की याचिका पर सीबीएसई स्कूल को नोटिस जारी किया
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सुप्रीम कोर्ट ने दसवीं कक्षा के मूल्यांकन में सेंट जेवियर इंटरनेशनल स्कूल पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए दसवीं कक्षा के उत्तीर्ण छात्रों द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सीबीएसई को नोटिस जारी किया।

जस्टिस एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार की बेंच ने 14 फरवरी, 2022 को नोटिस जारी करते हुए अपने आदेश में कहा,

"नोटिस जारी किया जाता है। याचिकाकर्ता के वकील ने प्रस्तुत किया कि इस अदालत द्वारा दी गई स्वतंत्रता के संदर्भ में, याचिका की एक प्रति प्रतिवादियों को दी गई है। प्रतिवादी के लिए कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। तदनुसार जारी नोटिस पर 14 फरवरी तक जवाब दाखिल किया जाए।"

याचिकाकर्ता छात्रों की ओर से एडवोकेट ममता शर्मा पेश हुईं।

याचिका का विवरण

याचिकाकर्ताओं ने अवैध रूप से पैसे की मांग करने और दसवीं कक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए उसी स्कूल में ग्यारहवीं कक्षा में प्रवेश लेने के लिए अनुचित दबाव डालने के लिए स्कूल के खिलाफ जांच के निर्देश देने की मांग की थी।

याचिका में यह तर्क दिया गया कि स्कूल ने जानबूझकर शीर्ष न्यायालय के 5 अगस्त, 2021 को उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों के एसोसिएशन बनाम भारत संघ एंड अन्य में पारित आदेश का उल्लंघन किया।

5 अगस्त, 2021 के आदेश में शीर्ष न्यायालय ने सीबीएसई के वकील की प्रस्तुतियां दर्ज की थीं कि वह उस बोर्ड के तहत पंजीकृत सभी स्कूलों को आंतरिक मूल्यांकन अंक, पिछले तीन वर्षों में उच्चतम औसत और परिणाम द्वारा निर्दिष्ट अंकों को सूचित करने के निर्देश जारी करेगा।

याचिका में यह आरोप लगाया गया कि सीबीएसई द्वारा 1 मई, 2021 को मूल्यांकन नीति को अधिसूचित करने के बाद स्कूल ने जूम मीटिंग की थी। इसमें अध्यक्ष ने खुले तौर पर छात्रों को अपने स्कूल में ग्यारहवीं कक्षा में प्रवेश लेने के लिए कहा और बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए फिर से उत्तर पुस्तिकाएं लिखने का विकल्प दिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जिन छात्रों ने उसी स्कूल में प्रवेश लेने के लिए स्कूल के अनुरोध पर सहमति व्यक्त की और मांग की गई राशि का भुगतान किया, उन्हें बहुत अच्छे अंक दिए गए, जिसमें प्रवेश लेने से इनकार करने वाले छात्रों के अंक मनमाने ढंग से और अवैध रूप से काटे गए।

याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई ने 29 अक्टूबर, 2021 को स्कूल को प्रासंगिक डेटा प्रदान करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद स्कूल ने छात्रों को उत्तर पुस्तिकाएं प्रदान करने से इनकार किया।

प्रतिवादियों को स्कूल द्वारा तैयार की गई 1 मई की मूल्यांकन नीति के संदर्भ में तर्कसंगत दस्तावेज, स्कूल द्वारा आयोजित प्रत्येक परीक्षा और प्रत्येक विषय की उपस्थिति पत्र, परिणाम समिति की रिपोर्ट और कक्षा दसवीं कक्षा के सभी छात्रों के लिए विस्तृत स्कोरकार्ड प्रदान करने के निर्देश की मांग की गई थी।

दसवीं कक्षा के उत्तीर्ण छात्रों ने स्कूल को छात्रों को उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने का निर्देश देने और सीबीएसई को उसकी मूल्यांकन नीति के अनुसार गैर-अनुपालन कार्यवाही शुरू करने का निर्देश देने के लिए भी प्रार्थना की।

अंत में, सीबीएसई को स्कूल से वास्तविक रिकॉर्ड एकत्र करने के बाद मूल्यांकन नीति के आधार पर याचिकाकर्ताओं के रिज्लट की समीक्षा करने और नए सिरे से रिजल्ट घोषित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई।

याचिका का मसौदा एडवोकेट ममता शर्मा ने तैयार किया है और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड रवि प्रकाश के माध्यम से दायर किया गया है।

केस का शीर्षक: शुभाशीष बेहरा एंड अन्य बनाम सीबीएसई एंड अन्य| डब्ल्यूपी (सिविल) 1331/2021

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