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सुप्रीम कोर्ट ने रेप केस में अन्नाद्रमुक नेता एम. मणिकंदन को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली याचिका में नोटिस जारी किया

Brij Nandan
13 May 2022 9:11 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने रेप केस में अन्नाद्रमुक नेता एम. मणिकंदन को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली याचिका में नोटिस जारी किया
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बलात्कार के एक मामले में पूर्व मंत्री और अन्नाद्रमुक नेता एम. मणिकंदन को सशर्त जमानत देने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।

सीजेआई एनवी रमाना, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस हेमा कोहली की पीठ ने शिकायतकर्ता लड़की द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका में निर्देश जारी किया।

पूर्व मंत्री पर शादी का झांसा देकर बलात्कार का आरोप लगाया गया था और उन्हें पिछले साल 7 जुलाई को जमानत मिलने तक 26 जून, 2021 को गिरफ्तार किया गया था।

आदेश के माध्यम से जस्टिस एम. निर्मल कुमार ने यह देखते हुए कि बलात्कार और सहमति से यौन संबंध के बीच एक स्पष्ट अंतर है, मंत्री को सशर्त जमानत दी।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता एक मलेशियाई नागरिक है जो मलेशियाई पर्यटन विभाग और निगम में कार्यरत थr। 3 मई, 2017 को अपने आधिकारिक काम के दौरान, वह आरोपी के संपर्क में आई क्योंकि आरोपी ने मलेशिया में एक व्यवसाय शुरू करने में अपनी रुचि व्यक्त की थी। इसके कुछ समय बाद ही शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच संबंध शुरू हो गए और दोनों साथ रहने लगे।

5 साल तक उनके साथ रहने की अवधि के दौरान शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी उसे शारीरिक रूप से उत्पीड़ित कर रहा है।

इसके अलावा, आरोप लगाया गया कि शादी के लगातार आश्वासन के बावजूद, आरोपी ने शिकायतकर्ता से शादी नहीं की। नतीजतन, आरोपी ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता की निजी तस्वीरों को लीक करने की धमकी भी दी, अगर वह उसकी मांग के अनुसार मलेशिया नहीं लौटी।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके रिश्ते के दौरान, उसे कई मौकों पर गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि शिकायतकर्ता इस तथ्य से अवगत थी कि याचिकाकर्ता एक विवाहित व्यक्ति है और उसके बच्चे भी हैं और वह एक सार्वजनिक व्यक्तित्व भी है।

इसके अलावा, अदालत ने पाया कि एकत्र किए गए सबूतों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है कि शिकायतकर्ता को आरोपी द्वारा गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया गया था।

शिकायतकर्ता के आरोपों का खंडन करते हुए अदालत ने कहा था कि शिकायतकर्ता ने जानबूझकर आरोपी की संपत्ति और जीवन शैली का आनंद लिया था और स्वेच्छा से वर्ष 2017 से अपने रिश्ते को जारी रखा था।

इसके अलावा, 8 अगस्त, 2017 को आरोपी द्वारा अपना मंत्री पद खोने के उदाहरण का हवाला देते हुए अदालत ने अनुमान लगाया कि शिकायतकर्ता द्वारा आरोपी के साथ साझा किए गए संबंध सहमति से थे।

केस का शीर्षक: X बनाम तमिलनाडु राज्य एंड अन्य


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